PM Modi ने मतुआ समुदाय के प्रमुख मंदिर में की पूजा-अर्चना, वोटिंग से पहले क्यों अहम है ये दर्शन?
West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानस्साा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल (रविवार) को उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर स्थित मतुआ महासंघ के मुख्य मंदिर 'ठाकुरबाड़ी' में पूजा-अर्चना की। उन्होंने बांगौन में एक चुनावी रैली को संबोधित करने से ठीक पहले यह दौरा किया, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की मतुआ समुदाय तक पहुaच के एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
ठाकुरबाड़ी मतुआ संप्रदाय के संस्थापक हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर की विरासत का केंद्र है। यह 19वीं सदी के मतुआ महासंघ का आध्यात्मिक और संगठनात्मक केंद्र भी है, जिसका मुख्य लक्ष्य शिक्षा व सामाजिक सुधारों के जरिए नामाशूद्र समुदाय का उत्थान करना था।

दर्शन के बाद पीएम मोदी ने शेयर की फोटो
प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा, "आज सुबह मतुआ ठाकुर मंदिर में पूजा की। श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी और श्री श्री गुरुचंद ठाकुर जी के आदर्श हमारे समाज को लगातार रोशन कर रहे हैं।"
मतुआ समुदाय का समर्थन क्यों है जरूरी?
भाजपा के लिए मतुआ समुदाय का समर्थन 2021 के विधानसभा चुनावों में उसके मजबूत प्रदर्शन में महत्वपूर्ण रहा था। यह समुदाय पश्चिम बंगाल में एक निर्णायक चुनावी शक्ति है, जो कम से कम 34 विधानसभा सीटों और भारत-बांग्लादेश सीमा से सटी लगभग दो दर्जन अन्य सीटों पर सीधा प्रभाव डालता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 में ठाकुरनगर और 2021 में बांग्लादेश के ओराकांडी का भी दौरा किया था!
भारत के पीएम का ये है पहला दौरा
बांगौन रैली में उन्होंने अपनी ओराकांडी यात्रा को याद किया और कहा,"...आज जब मैं यहां आया, तो कई यादें ताजा हो गईं। चार-पांच साल पहले मुझे सीमा पार ओराकांडी जाने का सौभाग्य मिला था। वहां मतुआ समुदाय से मिलना और उनकी आस्था व परंपराओं से जुड़ना एक असाधारण अनुभव था। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला ऐसा दौरा था। मुझे वहां के मंदिर में पूजा करने का अवसर भी मिला।"
मतुआ समुदाय से किया ये वादा
रैली में प्रधानमंत्री ने मतुआ समुदाय की लंबे समय से चली आ रही नागरिकता की मांग पर विशेष रूप से जोर दिया। उन्होंने वादा किया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत सभी पात्र नामाशूद्र सदस्यों को शीघ्र ही नागरिकता प्रदान की जाएगी। यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि समुदाय का एक बड़ा हिस्सा दशकों से बांग्लादेश से आए प्रवासियों का है।
हालांकि, मतुआ-बहुल उत्तर 24 परगना और नदिया क्षेत्रों में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)' के तहत मतदाता लिस्ट में किए गए बड़े पैमाने पर परिवर्तन ने चुनावी परिदृश्य को काफी जटिल बना दिया है। इस गहन अभियान से अकेले उत्तर 24 परगना में लगभग 3.25 लाख नाम हटा दिए गए।
गाइघाटा और बागदाह विधानसभा क्षेत्रों में, चिह्नित मतदाताओं के बीच विलोपन दर 67% से 88% तक थी। नदिया के कृष्णानगर उत्तर, कृष्णानगर दक्षिण और राणाघाट खंडों में भी इसी तरह का पैटर्न दिखा, जहाँ जांचे गए 90% से अधिक नाम अंतिम सूचियों से बाहर कर दिए गए। (एजेंसी इनपुट सहित)












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