West Bengal elections 2021:क्या है नेताजी सुभाष चंद्र बोस और दूसरे महापुरुषों को लेकर भाजपा की रणनीति ?
नई दिल्ली- सोमवार को केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती (Netaji Subhash Chandra Bose's 125th birth anniversary) मनाने के लिए जो पैनल बनाया है, उसकी कमान गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) के हाथों में सौंपी गई है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की है। संकेत साफ है। अगले 6 महीने में पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विधानसभा चुनाव होने हैं और उसमें बीजेपी को 200 से ज्यादा सीटें जिताने की जिम्मेदारी शाह ने खुद अपने कंधों पर ले रखी है। यानि आने वाले समय में बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (home minister Amit Shah) के बीच नेताजी को लेकर भी टकराहट देखने को मिल सकती है। दरअसल, अकेले नेताजी ही नहीं हैं। बंगाल के कई ऐसे महापुरुष हैं, जिनका बीजेपी किसी ना किसी रूप में गौरवगान करने की रणनीति पर काम कर रही है।

टैगोर को लेकर शुरू हो चुकी है टीएमसी टकराहट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly elections 2021) में बीजेपी (BJP) और टीएमसी(TMC) के बीच बंगाल के महापुरुषों (Bengal icons) को लेकर जंग कितनी भयंकर होने वाली है, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि अमित शाह (Amit Shah) अभी शांति निकेतन (Shanti Niketan) होकर आए तो लगे हाथ ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)ने भी बीरभूम (Birbhum) में रैली करने की घोषणा कर डाली। इतना ही नहीं, उन्होंने शाह पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore)के अपमान का आरोप भी लगा डाला था। बनर्जी बोलीं, '......हमारे हीरो का कोई अपमान करेगा तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैं जन गण मन का अपमान नहीं सहूंगी।' इसी दौरान उन्होंने 28-29 दिसंबर को बीरभूम जाने का ऐलान किया। दरअसल, ममता भाजपा के उस पोस्टर को लेकर अमित शाह पर निशाना साध रही थीं, जिसपर कथित तौर पर उनकी तस्वीर टैगोर की तस्वीर से ऊपर दिखाई गई थी। यहां गौर करने वाली बात है कि शाह नेताजी पर बने पैनल के हेड बने हैं तो ममता शांति निकेतन को लीड करती हैं।

शाह के लिए सफल चुनावी प्रयोग स्थल साबित हो चुका है बंगाल
नेताजी की सियासी विरासत का बंगाल की धरती पर आज भी बहुत गहरा प्रभाव है। लेकिन, खुद उनके वंशज अलग-अलग विचारधारों में बंट चुके हैं। मसलन, उनके एक परपोते सौगत बोस (Sugata Bose)टीएमसी के सांसद हैं तो दूसरे परपोते चंद्र कुमार बोस (Chandra Kumar Bose) बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। अब जब मोदी सरकार बुधवार यानि 23 जनवरी से उनकी 125वीं जयंती मनाने के लिए शाह की अगुवाई में पैनल की घोषणा कर चुकी है, एक बार फिर से विधानसभा चुनाव तक उनकी विरासत को लेकर दोनों दलों में रस्साकशी देखने को मिल सकती है। अमित शाह के लिए पश्चिम बंगाल एक बेहतर चुनावी प्रयोग स्थली साबित हो चुकी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को वहां बेहतरीन कामयाबी दिलाई थी। इसलिए, विधानसभा चुनाव भी भाजपा उन्हीं की बिछाई सियासी बिसात पर लड़ने वाली।

बंगाल के महापुरुषों का गुनगान करेगी भाजपा
बंगाल चुनाव में भाजपा की एक रणनीति यही है कि वह ये साबित करने की कोशिश करेगी कि प्रदेश के महापुरुषों को तृणमूल कांग्रेस की सरकार में उचित सम्मान नहीं मिला। ममता बनर्जी 2011 में सत्ता में आईं, लेकिन बंगाली और बाहरी का भेद बढ़ाने वाली नेता ने बंगाली पहचानों को ही नजरअंदाज कर दिया। इसका संकेत इसी से मिलता है कि अमित शाह जब 19 और 20 दिसंबर को दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुंचे तो वह शांति निकेतन (Shanti Niketan)जाने से पहले स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) को श्रद्धांजलि देने के लिए रामकृषण मिशन (Ramkrishna Mission) भी गए। रामकृषण मिशन और स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाता जगजाहिर है। इसके बाद शाह महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद खुदीराम बोस के मेमोरियल भी गए। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा (BJP Chief JP Nadda) भी रामकृष्ण मिशन का दौरा कर चुके हैं।

इन सभी महापुरुषों का गुनगान करेगी भाजपा
पश्चिम बंगाल में भाजपा किसी को पार्टी का मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में नहीं पेश कर रही है। टीएमसी को भाजपा की इस दुखती रग का अंदाजा है। इसलिए, ममता बंगाली बनाम बाहरी को मुद्दा बनाना चाहती हैं। उनके इसी दबाव का असर है कि अमित शाह को कहना पड़ा है कि अगला जो भी मुख्यमंत्री होगा वह बंगाली ही होगा। लेकिन, इसके साथ ही पार्टी टीएमसी को बंगाली महापुरुषों की अवहेलना और केवल तुष्टिकरण में लगे होने के आरोपों में घेरने के लिए उन सबके महिमामंडन की योजना भी बना रही है, जिससे ममता की सियासत की धार कुंद की जा सके। मसलन, पार्टी टैगोर, बोस और स्वामी विवेकानंद के अलावा बंकिम चंद्र चटर्जी ( Bankim Chandra Chatterjee), चैतन्य महाप्रभु (Chaitanya Mahaprabhu), रामकृष्ण परमहंस (Ramkrishna Paramhans) और श्री अरविंदो (Sri Aurobindo) के विचारों-संस्कारों और उनकी दी हुई शिक्षा की भी बात करेगी। यही नहीं बीजेपी के पास जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Shyama Prasad Mookerjee) की भी विरासत है, टीएमसी को जवाब देने के लिए वह उनका भी गुनगान करेगी, जो कि खुद बंगाल के धरतीपुत्र थे। मकसद साफ है कि इसके जरिए वह बंगाली और बाहरी की बात करने वाली टीएमसी नेता को पिछले 10 वर्षों से प्रदेश के तमाम महापुरुषों को उपेक्षित रखने के आरोपों में घेरना चाहती है।












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