Bengal Election violence: वोटिंग शुरू होते ही बंगाल में बवाल, मुर्शिदाबाद में बम हमला, मालदा में EVM पर हंगामा

West Bengal Election violence 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग के दौरान राज्य के कई इलाकों से तनाव और हिंसा की खबरें सामने आईं। सुबह से मतदान प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कुछ जगहों पर माहौल सामान्य दिखा, लेकिन मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आए। वोटिंग के बीच हुई झड़पों और बमबाजी की घटनाओं ने एक बार फिर बंगाल की चुनावी राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राज्य की 152 सीटों पर पहले चरण का मतदान हो रहा है, जबकि तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर भी वोट डाले जा रहे हैं। सुबह 9 बजे तक पश्चिम बंगाल में करीब 19 प्रतिशत और तमिलनाडु में लगभग 18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिसमें महिलाओं की भागीदारी खास तौर पर ज्यादा नजर आई।

West Bengal Election violence

मुर्शिदाबाद में वोटिंग से पहले बम धमाका (Murshidabad Bomb Attack Before Voting)

मुर्शिदाबाद जिले के नौदा इलाके में मतदान शुरू होने से पहले अचानक तनाव फैल गया। यहां कथित तौर पर मतदान क्षेत्र के पास देशी बम फेंके जाने की घटना सामने आई। धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित जगहों की ओर भागते दिखे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं। घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, हालांकि प्रशासन की तरफ से अब तक आधिकारिक तौर पर घायल लोगों की संख्या स्पष्ट नहीं की गई है।

घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा बल तुरंत मौके पर पहुंचे। पूरे इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया और संदिग्ध लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। शुरुआती जांच में यह देखा जा रहा है कि हमला चुनावी तनाव से जुड़ा था या किसी स्थानीय विवाद का हिस्सा था।

मालदा में ईवीएम खराब होने पर हंगामा (Malda EVM Issue Sparks Protest)

मालदा जिले के एक मतदान केंद्र पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में खराबी की शिकायत के बाद लोगों का गुस्सा देखने को मिला। मशीन के काम नहीं करने से वोटिंग कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। इससे नाराज मतदाताओं ने चुनाव अधिकारियों को घेर लिया और मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

चुनाव आयोग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की। ऐसे मामलों में तकनीकी दिक्कतें चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि मतदान को सुचारु रखने के लिए बैकअप व्यवस्था पहले से मौजूद रहती है।

भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच टकराव (BJP vs TMC Clash During Polling)

मुर्शिदाबाद में मतदान से पहले भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की भी खबर सामने आई। स्थानीय स्तर पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती तनातनी ने वहां के माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया।

इस घटना पर आम जनता उन्नयन पार्टी (AUJP) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने अपने समर्थकों से शांत रहने की अपील की है। उनका कहना है कि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए और किसी को डराने या धमकाने की मंशा नहीं है। उन्होंने प्रभावित इलाके का दौरा करने की भी बात कही।

कहां कितनी हुई वोटिंग?

हिंसा और छिटपुट वारदातों के बीच वोटिंग की रफ्तार काफी तेज देखी जा रही है। सुबह 9 बजे तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो बंगाल की 152 सीटों पर करीब 19% मतदान हो चुका है। वहीं दूसरी तरफ, तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर भी आज ही वोट डाले जा रहे हैं, जहां 9 बजे तक 18% वोटिंग दर्ज की गई।

एक दिलचस्प बात यह है कि बंगाल और तमिलनाडु, दोनों ही राज्यों में पोलिंग बूथों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। यह साफ संकेत है कि आधी आबादी इस बार सरकार चुनने में बड़ी भूमिका निभाने वाली है।

नेताओं के बयान और शांति की अपील

मुर्शिदाबाद की घटना पर 'आम जनता उन्नयन पार्टी' (AUJP) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इलाके में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों से शांत रहने की अपील की है। कबीर ने कहा, "मेरा मकसद किसी को डराना या चोट पहुंचाना नहीं है। मैं चाहता हूं कि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों और मैं खुद प्रभावित इलाके का दौरा करूंगा।"

क्या सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं? (Expert Analysis)

बंगाल के चुनावों का इतिहास अक्सर हिंसा से जुड़ा रहा है, और 2026 का यह चुनाव भी उससे अछूता नहीं दिख रहा है। मुर्शिदाबाद में भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और बमबाजी की घटनाएं यह बताती हैं कि जमीन पर स्थिति अभी भी काफी संवेदनशील है।

प्रशासन ने संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त बल तैनात किया है, लेकिन देसी बमों का इस्तेमाल और अचानक हुई झड़पें सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करती हैं। चुनाव आयोग के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती बाकी बचे घंटों में बिना किसी खून-खराबे के मतदान प्रक्रिया को पूरा कराना है। क्या यह हिंसा आगे के चरणों को भी प्रभावित करेगी?

बंगाल चुनाव और हिंसा का पुराना रिश्ता

पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा नई बात नहीं मानी जाती। राज्य के कई हिस्सों में मतदान के समय राजनीतिक टकराव, बूथ के बाहर तनाव और स्थानीय स्तर पर संघर्ष की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। यही वजह है कि हर चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ जाता है।

इस बार भी मतदान के पहले चरण में सामने आई घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि चुनावी मुकाबला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर बेहद संवेदनशील भी है। सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती के बावजूद अलग-अलग इलाकों में तनाव की खबरें यह दिखाती हैं कि मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।

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