West Bengal Election: 2021 में जहां एकतरफा थी जीत, 2026 में वहीं होगा असली खेल! ये 10 सीटें बनेंगी ‘गेम चेंजर’
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कुछ सीटें ऐसी हैं, जो सिर्फ जीत नहीं, बल्कि पूरे चुनाव का मूड तय करती हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर इतना बड़ा मार्जिन देखने को मिला कि मुकाबला लगभग एकतरफा हो गया था। अब 2026 के चुनाव में यही सीटें सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। सवाल सीधा है, क्या इन सीटों पर वही पकड़ कायम रहेगी या इस बार तस्वीर बदलेगी।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर इन सीटों का विश्लेषण बताता है कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि 2026 की रणनीति का आधार हैं। 2021 के वोट शेयर एनालिसिस के मुताबिक कुल 146 उम्मीदवार ऐसे रहे जिन्होंने अपने क्षेत्र में 50% या उससे ज्यादा वोट हासिल किए। ऐसे उम्मीदवारों की जीत को "डॉमिनेंट जीत" माना जाता है। तो आइए जानते हैं उन 10 सीटों के बारे में जहां मुकाबला एकतरफा (one-sided) था।

2021 की 'वन-साइडेड' सीटें
2021 में कई सीटों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा (BJP) के बीच मुकाबला दिखा जरूर, लेकिन नतीजों में कई जगह भारी अंतर देखने को मिला।
सुजापुर में TMC के एमडी अब्दुल गनी ने कांग्रेस को 1.30 लाख से ज्यादा वोटों से हराकर रिकॉर्ड बनाया। मटियाबुर्ज में अब्दुल खलीक मोल्ला की जीत भी एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से रही। मालतीपुर में अब्दूर रहीम बख्शी ने 50% से ज्यादा मार्जिन के साथ जीत दर्ज की, जो किसी भी पार्टी के लिए मजबूत जनाधार का संकेत है।
कोलकाता की सीट बालीगंज भी खास रही, जहां सुब्रत मुखर्जी ने 75 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। यह सीट शहरी वोट बैंक में TMC की मजबूत पकड़ दिखाती है।
West Bengal Election: टॉप 10 हाई मार्जिन सीटें
| क्रम संख्या | सीट का नाम | विजेता उम्मीदवार | पार्टी | जीत का अंतर (वोट) | अनुमानित वोट शेयर |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | सुजापुर (Sujapur) | एमडी अब्दुल गनी | TMC | 1,30,000+ | ~73% |
| 2 | मटियाबुर्ज (Metiabruz) | अब्दुल खलीक मोल्ला | TMC | 1,00,000+ | 76.85% |
| 3 | मालतीपुर (Malatipur) | अब्दूर रहीम बख्शी | TMC | 90,000+ | 50%+ |
| 4 | गोपालपुर (Goalpokhar) | मो. गुलाम रब्बानी | TMC | 73,514 | ~60% |
| 5 | बालीगंज (Ballygunge) | सुब्रत मुखर्जी | TMC | 75,359 | 70.60% |
| 6 | इस्लामपुर (Islampur) | अब्दुल करीम चौधरी | TMC | 37,440 | ~55% |
| 7 | कुमारगंज (Kumarganj) | तोराफ हुसैन मोंडल | TMC | 29,000+ | ~52% |
| 8 | कालचीनी (Kalchini) | बिशल लामा | BJP | 28,000+ | ~54% |
| 9 | कूचबिहार उत्तर (Cooch Behar Uttar) | सुकुमार रॉय | BJP | 14,000+ | ~51% |
| 10 | मटियागरा-नक्सलबाड़ी (Matigara-Naxalbari) | आनंदमय बर्मन | BJP | 25,000+ (अनुमानित) | ~53% |
- टॉप 10 में से 7 सीटें TMC के खाते में गईं
- 3 सीटों पर BJP का मजबूत प्रदर्शन रहा
- जिन सीटों पर 70%+ वोट शेयर मिला, वहां मुकाबला लगभग एकतरफा था
- 50% के आसपास वाले मार्जिन में 2026 में उलटफेर की सबसे ज्यादा संभावना है
सबसे ज्यादा वोट शेयर वाले टॉप 3 विजेता
| क्रम संख्या | विजेता का नाम | पार्टी | सीट | कुल रजिस्टर्ड वोट | कुल वैध वोट | विजेता को मिले वोट | वोट शेयर (%) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | अब्दुल खलीक मोल्ला | AITC | Metiabruz | 2,56,252 | 1,96,582 | 1,51,066 | 76.85% |
| 2 | एमडी अब्दुल गनी | AITC | Sujapur | 2,51,044 | 2,07,591 | 1,52,445 | 73.44% |
| 3 | सुब्रत मुखर्जी | AITC | Ballygunge | 2,47,640 | 1,50,962 | 1,06,585 | 70.60% |
सबसे कम वोट शेयर वाले टॉप 3 विजेता
| क्रम संख्या | विजेता का नाम | पार्टी | सीट | कुल रजिस्टर्ड वोट | कुल वैध वोट | विजेता को मिले वोट | वोट शेयर (%) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | रुकबानुर रहमान | AITC | Chapra | 2,47,207 | 2,13,175 | 73,866 | 34.65% |
| 2 | नर हरि महतो | BJP | Joypur | 2,49,382 | 2,02,767 | 74,380 | 36.68% |
| 3 | सुशांत महतो | AITC | Baghmundi | 2,49,316 | 2,06,303 | 75,905 | 36.79% |
पैटर्न क्या कहता है?
इन सीटों के आंकड़े तीन बड़े संकेत देते हैं। पहला, कोलकाता और शहरी इलाकों में TMC की पकड़ काफी मजबूत रही। दूसरा, अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर TMC को भारी बढ़त मिली। तीसरा, भाजपा का विस्तार हुआ, लेकिन कई मजबूत गढ़ों में वह चुनौती नहीं दे पाई।
यही कारण है कि इन सीटों को 2026 के चुनाव के लिए 'टेस्टिंग ग्राउंड' माना जा रहा है। अगर यहां मार्जिन कम होता है, तो इसका मतलब होगा कि मुकाबला कड़ा हो रहा है।
2026 में क्यों हैं गेम चेंजर?
इन सीटों की अहमियत सिर्फ पिछले रिकॉर्ड में नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा में है। अगर TMC इन सीटों पर फिर से भारी जीत दर्ज करती है, तो यह उसके मजबूत कोर वोट बैंक के बने रहने का संकेत होगा।
वहीं भाजपा के लिए चुनौती है कि वह इन सीटों पर अंतर कम करे। जीत जरूरी नहीं, लेकिन मार्जिन कम करना भी बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है। यानी 2026 का चुनाव सिर्फ सीट जीतने का नहीं, बल्कि इन 'बड़ी जीत वाली सीटों' पर गैप कम करने या बढ़ाने का भी होगा।
2021 में जो सीटें एकतरफा जीत का प्रतीक थीं, वही 2026 में सबसे बड़ा मुकाबला तय करेंगी। ये सीटें बताएंगी कि क्या बंगाल में सत्ता का संतुलन बदल रहा है या फिर TMC की पकड़ अब भी उतनी ही मजबूत है।












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