पहाड़ों पर हुई बर्फबारी से मैदानी राज्यों में घटा तापमान, 'ला नीना' के चलते इस साल पड़ेगी कड़ाके की सर्दी
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर: मानसून की वापसी के चलते पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है, जिसका असर अब मैदानी इलाकों पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले सप्ताह तक तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले दो हफ्तों के दौरान उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान में गिरावट की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले पांच दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत और पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में शुष्क मौसम रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पश्चिमी भाग में अलग-अलग स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे (-3 डिग्री सेल्सियस से -4 डिग्री सेल्सियस) रहने की संभावना है।
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मौसम विज्ञानियों के मुताबिक 'ला नीना' के चलते ही देश में अभी से कड़ाके की ठंड पड़ती दिखाई दे रही है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस साल पिछले सालों की तुलना में काफी ज्यादा ठंड पड़ेगी। भारत में जनवरी और फरवरी में देश के कुछ उत्तरी इलाकों में तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है। ऐसी स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने पहले ही इस साल कड़ाके की ठंड की चेतावनी जारी कर दी है।
उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में कई जगह बर्फबारी होने के कारण सर्दी बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश के मनाली की ऊंची चोटियों सहित लाहौल में कई स्थानों, दक्षिण और उत्तरी कश्मीर में मध्यम बर्फबारी हुई है। इसी तरह जम्मू कश्मीर के अनंतनाग, राजौरी में मुगल रोड, पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के पास भी बर्फबारी की वजह से तापमान में अच्छी खासी गिरावट दर्ज हुई है। उत्तराखंड में भी कई जगहों पर बर्फ गिरने की वजह से दिल्ली एनसीआर में मौसम का मिजाज बदल गया है।
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तमिलनाडु तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। अगले 48 घंटों के दौरान इसके पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है। इस कम दबाव वाले क्षेत्र से जुड़े चक्रवाती परिसंचरण से उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक एक ट्रफ रेखा बन गई है। इन प्रणालियों के प्रभाव में, तमिलनाडु में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। केरल और माहे में 1 नवंबर तक भारी बारिश की उम्मीद थी। 31 अक्टूबर तक तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। 1 नवंबर तक केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में गरज और बिजली गिरने की संभावना है।












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