इधर सिंधिया ने पहना कमलछाप गमछा, उधर दिग्विजय ने मानी अपनी ये भूल
22 बागी विधायकों में से अब कितने कांग्रेस के साथ, दिग्विजय सिंह ने बताई संख्या
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का सियासी मौसम लगातार करवट बदल रहा है। मंगलवार को कांग्रेस से अपना 18 साल पुराना नाता तोड़कर पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफा देने के साथ ही मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कांग्रेस के 22 विधायकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिनमें से 19 विधायक बेंगलुरु में ठहरे हुए हैं। कांग्रेस का कहना है कि कमलनाथ सरकार के पास पूर्ण बहुमत है और सरकार नहीं गिरेगी। इस बीच कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर अपनी एक भूल स्वीकार की है।

'अनुमान नहीं था कि सिंधिया कांग्रेस छोड़ देंगे'
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम का पद ऑफर किया गया था, लेकिन वो अपनी तरफ से नामांकित किसी विधायक को इस पद पर बिठाना चाहते थे। कमलनाथ ने एक चेले को लेने से इनकार कर दिया। सिंधिया राज्यसभा में कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते थे, लेकिन एक अति-महत्वाकांक्षी नेता को कैबिनेट का पद केवल मोदी-शाह ही दे सकते हैं। हमें इस बात का अनुमान नहीं था कि सिंधिया कांग्रेस छोड़ देंगे, वो हमारी गलती थी।'

'22 बागी विधायकों में से 13 कांग्रेस के साथ'
दिग्विजय सिंह ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा, 'कांग्रेस के 22 विधायक बेंगलुरु इसलिए गए, ताकि नेतृत्व के ऊपर दबाव बनाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया जा सके, लेकिन उनमें से किसी का भी इरादा पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का नहीं है। 22 बागी विधायकों में से 13 ने आश्वासन दिया है कि वो कांग्रेस नहीं छोड़ रहे हैं। जब शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को गिराने में नाकाम रहे तो भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को बरगला लिया। भाजपा ने विधायकों को पैसे देकर खरीदने की कोशिश की। मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार फ्लोर टेस्ट पास करेगी, ना तो हम चुप बैठ रहे हैं और ना ही सो रहे हैं।'

संकट में कमलनाथ सरकार
इससे पहले मंगलवार को मध्य प्रदेश में एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला। जैसे ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर पर अपने इस्तीफे की जानकारी दी, उसके तुरंत बाद मध्य प्रदेश के 19 कांग्रेस विधायकों ने अपने इस्तीफे राज्यपाल को मेल कर दिए। इन 19 विधायकों के बाद तीन और विधायकों ने भी अपना इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस विधायक बिसाहू लाल साहू ने अपना इस्तीफा देने के बाद कहा कि अभी कुछ और विधायक पार्टी से इस्तीफा देंगे, क्योंकि कमलनाथ सरकार में विधायकों की अनदेखी की जा रही है। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार संकट में आ गई है।

'चारों निर्दलीय विधायक हमारे साथ'
हालांकि कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि निर्दलीय विधायकों का समर्थन उनके साथ है और भाजपा के भी कुछ विधायक उनके संपर्क में हैं। शोभा ओझा ने कहा, 'कमलनाथ सरकार के पास नंबरों की कोई कमी नहीं है और वो सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे। कुल 4 निर्दलीय विधायक हैं, चारों हमारे साथ हैं। जो सिंधिया जी के साथ गए हैं वो भी हमारे साथ हैं क्योंकि वो समझ रहे हैं कि एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षा के चलते उन सबके भविष्य दांव पर हैं। हमारे पास गिनती है, जो हम विधानसभा के पटल पर साबित कर देंगे, नंबर की कोई कमी नहीं है। बेंगलुरु वाले विधायक हमारे साथ हैं, वो कांग्रेस के साथ हैं। भाजपा के विधायक भी हमारे टच में हैं।'

निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा सीएम के घर पहुंचे
वहीं, बुधवार को एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के घर पहुंचे। सुरेंद्र सिंह शेरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'प्रदेश सरकार बची रहेगी। सभी निर्दलीय विधायक हमारे साथ हैं। जो विधायक बेंगलुरू में हैं, हम उन सभी को वापस लेकर आएंगे।' मामले को लेकर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री बाला बच्चन ने भी एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत स्थिति में है। बाला बच्चन ने बताया कि हर कोई मुख्यमंत्री के संपर्क में है, जल्द ही सबकुछ ठीक हो जाएगा। हम विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित करेंगे और हमारी सरकार 2023 तक जारी रहेगी।












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