16:17 में डीरेल हुई बुंदेलखंड की वॉटर ट्रेन
हम शाम के 4:17 मिनट की बात नहीं कर रहे हैं, हम बात कर रहे हैं 2016:2017 की। सोलह तेजी से आगे बढ़ रहा है और 17 में चुनाव हैं। बस इसी कारण बुंदेलखंड की वॉटर ट्रेन पटरी से उतर गई। जी हां मराठवाड़ा के लातूर की तर्ज पर जब बुंदेलखंड को टैंकर के जरिये पानी सप्लाई करने का कदम केंद्र ने उठाया, तो उसे सियासी रंग देकर लाल झंडी दिखा दी गई।
यूपी चुनाव- बुंदेलखंड में "बाबू" बन गया जेंटलमैन

सपा जहां जनता के सामने अच्छा बनने में जुटी हुई है, वहीं भाजपा इस मुद्दे को 2017 तक खींचने के पुरजोर प्रयास करेगी। वहीं बसपा जैसी पार्टियां रह-रह कर सूखे की आग में घी डालेंगी।
'पानी की राजनीति' का केंद्र पर आरोप!
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने गुरुवार को बुंदेलखंड जल संकट पर इंडियन रेलवे की ओर से भेजे गए वाटर एक्सप्रेस को केंद्र सरकार की राजनीति करार दिया। कानपुर में मीडिया से बातचीत में शिवपाल ने कहा कि बुंदेलखंड में पानी की समस्या नहीं है।
केंद्र सरकार वहां ट्रेन से पानी भेजकर राजनीति कर रही है। लेकिन सवाल एक बार फिर वही कि शिवपाल इस बात का दावा तो कर रहे हैं कि बुंदेलखंड में पानी की कोई समस्या नहीं है लेकिन क्या वे वाकई बुंदेलखंड के हालात से रूबरू हैं। शायद नहीं। चलिए हम बताते हैं आपको वहां के हालात।
बुंदेलखंड के लिए ये दावा झूठा है 'मंत्री जी'!
हमीरपुर के मौदहा ब्लॉक का गुसियारी गांव में करीबन 70 हैंडपंप गिनती की खातिर तो हैं लेकिन इनमें से करीबन 95 फीसदी नमूना बनकर खड़े हैं। बांदा शहर के इर्द गिर्द के गांवों में ही नजर डाली जाए तो स्थिति काफी दयनीय नजर आती है। वादों की हकीकत नंगी आँखों में बेबसी के आंसू ला देती है।
बांदा शहर के ही नवाब टैंक जैसे कई बड़े तालाब व्यवस्थाओं की ढ़ीला हवाली की वजह से प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। गर वास्तव में बुंदेलखंड में पानी की समस्या नहीं है तो लोग पानी के लिए दर-दर न भटकते। पलायन के लिए मजबूर न होतेे।
बुंदेलखंड की दशा आंकड़ों में
- देश में बढ़ती आबादी के कारण प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष जल उपलब्धता सिर्फ 75 फीसद बची है।
- बुंदेलखंड की आबादी 1.83 करोड़ है। बुंदेलखंड में प्रति व्यक्ति उपलब्धता औसत से कम है।
- हर व्यक्ति के हिस्से में बादलों से ही चार बाल्टी की बजाए सिर्फ तीन बाल्टी पानी मिल रहा है।
- बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा खराब स्थिति महोबा की है, जहां लोग पानी को तरस रहे हैं।
- केवल महोबा में 85 फीसदी फसल सूख गई है। यानी उससे किसानों को एक दाना भी नहीं मिलने वाला।
- बुंदेलखंड के 80 फीसदी ट्यूबवेल सूख गये हैं, जिससे खेतों में दूर किचन में भी पानी नहीं पहुंच रहा है।
- 2009 में बुंदेलखंड के लिये केंद्र ने 7,266 करोड़ रुपए का पैकेज दिया, लेकिन उसके बावजूद पिछले सात सालों में कुछ नहीं बदला।
'पानी पर सियासत' या 'सियासत का पानी'
सूबे में मौजूद सपा सरकार बुंदेलखंड के लिए पानी की ट्रेन की घोषणा के साथ ही इस बात के मंथन में जुट गई कि आखिर इससे क्या नफा हो सकता है भाजपा को। जबकि यूपी में विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं। कहीं न कहीं इस पहल से भाजपा को एक प्रदेश के स्तर से एक मुद्दा भी मिल रहा था जिसे चुनावों में उछाला जा सके। बुंदेलखंड में विधान सभा की 19 सीटें हैं। जो कि यूपी के चुनाव में राजनीतिक पार्टियों की हार-जीत के लिए बेहद अहम भूमिका अदा करती हैं।
फिलवक्त सात सीटें बसपा के पास और सात सीटें सपा के पास हैं। उप चुनाव से पहले भाजपा के पास तीन सीटें थीं। जबकि सपा के पास पांच सीटें थीं। लेकिन उपचुनाव में सपा ने हमीरपुर और चरखारी की दोनों सीटें भाजपा से छीन ली। गर लोकसभा सीटों की बात की जाए तो चार सीटों में से चारों पर भाजपा काबिज है। जो कि सपा खेमे के लिए जितना चिंता का विषय बना हुआ है उतनी ही भाजपा के लिए अस्तित्व का सवाल भी। जिस वजह से केंद्र यानि की एनडीए सरकार द्वारा भेजे गए पानी पर सपा सरकार ने रोक लगा दी।
बहरहाल सपा के इस कदम के बाद भाजपा ने आगामी 2017 के चुनावों में समाजवादी पार्टी का घिराव करने का एक मौका तो तैयार ही कर लिया है। हां लोगों का राजनीति के इतर मानना है कि अगर ये पानी बुंदेलखंड पहुंच जाता तो कम से कम लोगों को कुछ फीसदी तो तसल्ली मिलती।












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