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सावधान कहीं आप भी तो ये जहर नहीं खा रहे ?

बेंगलुरु। बदलते दौर के साथ नशे के बढ़ते कारोबार ने बीमारियों का भी जाल बिछा दिया है। अगर आप सोच रहे भाई मैं तो कोई भी तंबाकू प्रोडक्ट का सेवन नहीं करता इसलिए सुरक्षित हूं तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। असल में आप जिस तंबाकू रहित पान मसालें का सेवन कर रहे हैं असल में वह तंबाकू रहित नहीं हैं। इसमें ऐसा रासायनिक मिला हुआ है जिससे आपकी जिंदगी को खतरा पहुंच रहा हैं। हाल ही में हुई एक जांच में खुलासा ने पान मसाला बनाने वाली कंपनियों की पोल खोल दी हैं। असल में वह झूठ बोलकर लोगों की जिदंगी जोखिम में डाल रहे हैं। यह खुलासा पान मसाला निर्मित करने वाली कंपनियों के काली करतूत से जुड़ा हुआ हैं।

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इसलिए अगर आप भी तंबाकू रहित पान मसाला के शौकीन हैं तो सतर्क होकर उसे आज ही छोड़ दीजिए। हाल ही में हुई एक जांच में देश भर में पान मसाला कंपनियों का झूठ निकोटीन का दावा महज फरेब साबित हुआ हैं । भारत सरकार के राष्‍ट्रीय तंबाकू परीक्षण प्रयोगशाला में जब नामी कंपनियों के पान मसालों की जांच की गई तो उनमें खतरनाक निकोटीन की मौजूदगी पाई गई। जबकि पान मसाला कंपनियां पान मसाले के पाऊच पर साफ साफ लिखती हैं कि इसमें निकोटीन और तंबाकू नहीं हैं। दुखद पहलू यह हैं कि इस खुलासे के बाद भी देश भर में पान मसाला धडल्‍ले से बिक रहा है। कई राज्यों में सरकारों ने कुछ समय तक रोक लगायी लेकिन कुछ दिनों में वह निष्‍प्रभावी साबित हुई।

पान मसाला में निकला निकोटीन

गौरतलब हैं कि यह खुलासा पिछले दिनों तब हुआ जब बिहार से पान मसाला के 7 प्रमुख ब्रांडों के पैकेट राष्‍ट्रीय तंबाकू परीक्षण प्रयोगशाला में जांचे जाने पर उनमें निकोटीन पाया गया। पान मसालों में विषाक्त मैग्‍नीशियम कार्बोनेट होने की एक रिपोर्ट के बाद बिहार सरकार ने इनकी जांच कराने का फैसला लिया था। इसके साथ ही 30 अगस्‍त को पान मसाला के 15 ब्रान्‍डों की बिक्री उत्‍पादन,भंडारण और ढुलाई को प्रतिबंधित कर दिया था। बिहार से लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट के अनुसार रजनीगंधा, कमला पसंद समेत 7 पान मसाला ब्रांड में खतरनाक रसायन निकोटिन की मौजूदगी पाई गई है। मधु, सुप्रीम, राजश्री, सिग्नेचर और रौनक आदि नाम के पान मसाला भी इसमें शामिल हैं। वहीं मध्‍य प्रदेश की खाद्य व औषधि विभाग की टीम ने शुक्रवार को एक जनरल स्‍टोर पर छापा मारा। इसमें विजय एजेंसी से पान मसाला का सैंपल लिए। सैंपल भोपाल लैब भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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टाटा मेमोरियल सेंटर और वॉयस ऑफ टोबैको विक्टिम वीओटीवी के संस्‍थापक उप निदेशक पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय प्रयोगशालाओं में कई जांचों में समाने आ चुका है कि पान मसालों के कई हनिकारक प्रभाव होते हैं। चतुर्वेदी के अनुसार पान मसाला जैसे खतरनाक उत्‍पादों को पूरे देश में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। कैंसर विशेषज्ञ डाक्टर हरित चतुर्वेदी ने कहा कि इन उत्पादों मे न केवल मैग्ननीशियम कार्बोनेट बल्कि अन्‍य खतरनाक मिलावट भी हो सकती है। खाद्य सुरक्षाअधिनियम 2011 के नियमन के अनुसार 2.3.4 निकोटिन या तंबाकू को किसी भी खाद्य उत्‍पादों में मिलाना प्रतिबंधित है यह पान मसाला के साथ निकोटीन को मिलाना सवोच्‍च न्‍यायालय के आदेश की अवमानना है। शीर्ष अदालत ने 3 अप्रैल 2013 को अंकुर गुटखा के मामले में पान मसाला और गुटखा और गुटख में निकोटीन होने की वजह से प्रतिबंध लगा दिया था।

महत्‍वपूर्ण जानकारी

दुनियाभर में हर साल 70 लाख लोग और भारत में हर दिन करीब 2739 लोग तंबाकू पान मसाले व अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर व अन्य बीमारियों से दम तोड़ देते हैं। भारत में वैश्विक स्‍तर पर मुंह के कैंसर का खतरा सबसे अधिक है। एक साल में 75 से 80 हजार कैंसर के नए मरीजों का पता चलता है। माउथ कैंसर के 86 प्रतिशत मरीज भारत में पाए जाते हैं। माउथ कैंसर के 90 प्रतिशत मामलों में चबाने वाली तंबाकू के कारण ही होता हैं। मध्यप्रदेश में तंबाकू जनित बीमारियों से हर साल 90 हजार लोग काल के गाल में समा जाते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 28.1 प्रतिशत लेाग किसी न किसी रूप में चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का उपभोग करते हैं, जिसमें 38.7 प्रतिशत पुरुष एवं 16.8 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। तंबाकू के उपयोग के चलते मुंह, फेफड़े का कैंसर हो जाता है और राज्य में हर साल कैंसर व तंबाकू जनित अन्य बीमारियों के कारण 90 हजार लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं।

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