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Waqf Bill: JPC को किसने भेजे 1.3 करोड़ फीडबैक? क्यों हो रही है ISI, चीन की संदिग्ध साजिश की जांच की मांग?

Waqf Bill feedback controversy: मोदी सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में वक्फ (संशोधन) विधेयक पास कराने की तैयारी में है। इस विधेयक पर चर्चा के लिए जो संयुक्त संसदीय समिति (JPC) बनाई गई है, उसने लोगों से इसपर राय मांगी है। लेकिन, जेपीसी के पास जिस तरह से करीब 1.3 करोड़ फीडबैक पहुंच गए हैं, उसको लेकर सवालिया निशान लग रहा है।

भाजपा सांसद और जेपीसी के सदस्यों में से एक निशिकांत दुबे ने इस मसले पर समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल को लिखी चिट्ठी में कई ऐसे संदेह जताए हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।

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भारी पैमाने पर मिले फीडबैक की जांच की मांग
उन्होंने इतनी भारी तादाद में फीडबैक को लेकर 'गंभीर चिंताएं' जताई हैं। दुबे ने इन फीडबैक के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जांच कराए जाने की मांग की है, जिसमें इनकी 'उत्पत्ति के स्थान' की जांच भी शामिल है।

बीजेपी सांसद ने जताई देश-विरोधी ताकतों की साजिश की आशंका
झारखंड के गोड्डा से सांसद दुबे की आशंका है कि इतने बड़े पैमाने पर फीडबैक भेजे जाने के पीछे 'कट्टरपंथी ताकतें', 'जाकिर नाइक जैसे व्यक्ति' या 'आईएसआई या चीन या उनसे जुड़े लोग' हो सकते हैं।

निशिकांत दुबे ने राष्ट्रीय सुरक्षा का उठाया सवाल
दुबे ने आशंका जताई है कि अगर इस प्रक्रिया में ऐसी ताकतें शामिल हैं तो यह 'हमारी विधायी प्रक्रिया को प्रभावित करने', 'हमारी संसदीय प्रणाली के नींव पर हमला करने' की कोशिश है, इसलिए इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसले' की तरह देखना चाहिए।

वक्फ (संशोधन) विधेयक पिछले संसद सत्र में पेश किया गया था। इसमें वक्फ की मौजूदा व्यवस्था में भारी बदलाव के प्रस्ताव किए गए हैं। 20 सितंबर तक इस मसले पर बनी संयुक्त संसदीय समिति की 12 बैठकें हो चुकी हैं।

'फीडबैक के ज्यादातर कंटेंट एक तरह के हैं'
जगदंबिका पाल को लिखी चिट्ठी में दुबे ने कहा है, 'इन फीडबैक के ज्यादातर कंटेंट एक तरह के हैं या बहुत मामूली अंतर वाले हैं।' उनके मुताबिक, 'ज्यादा बड़ा और अधिक गंभीर मुद्दा ये है कि इसमें मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों के शामिल होने की संभावना है।'

भारतीय संप्रभुता पर अप्रत्याशित हमले की कोशिश- दुबे
उन्होंने इस्लामी उपदेशक जाकिर नायक और उससे जुड़े लोगों के साथ ही, 'पाकिस्तान की आईएसआई, चीन और जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और तालिबान जैसे कट्टरपंथी ताकतों' के शामिल होने की आशंका जताई है।

उनका दावा है कि 'अगर इतनी बड़ी तादाद में फीडबैक के पीछे विदेशी खुफिया एजेंसियां हैं तो यह भारतीय संप्रभुता पर अप्रत्याशित हमले की तरह है और जानबूझकर भारतीय संसद की स्वतंत्रता को कमतर करने की कोशिश है।'

उन्होंने मांग की है कि तत्काल गृह मंत्रालय को इसकी व्यापक जांच की सलाह दी जाए और उसके परिणाम को सदस्यों से साझा किया जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

बीजेपी लोकतंत्र का मजाक बना रही है-कांग्रेस
हालांकि, बुधवार को जब दुबे की चिट्ठी पर कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल से सवाल किया गया तो उन्होंने यह कह दिया कि 'बीजेपी लोकतंत्र का मजाक बना रही है।' 'अगर इतने बड़े देश में सिर्फ 1.5% लोग अपनी राय जाहिर करते हैं और उन्हें इससे तकलीफ हो गई, तो यह साफ है कि उन्हें (बीजेपी) लोकतंत्र में विश्वास नहीं है।'

हालांकि, जब दुबे की चिट्ठी पर केंद्रीय संसदीय मामलों और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से पूछा गया तो उन्होंने इसपर टिप्पणी से मना कर दिया।

सरकार को शीतकालीन सत्र में रिपोर्ट पेश होने की उम्मीद
उन्होंने कहा, 'संयुक्त समिति के बारे में मैंने जो समाचार सुना है, वह बहुत ही सकारात्मक है। एक करोड़ से ज्यादा राय आई है। यह सबकी सुन रहा है....सरकारी संगठनों, सामाजिक संगठनों को....मुझे लगता है कि संसदीय समिति की इतनी व्यापक सुनवाई पहले नहीं हुई....जब हमने इसका गठन किया तो इसे शक्ति दी.....अब ईमेल और किन परिस्थतियों में भेजे गए हैं, यह सिर्फ कमेटी ही देखेगी। हम सपोर्ट करेंगे।'

उन्होंने उम्मीद जताई है कि जिस तरह से यह समिति काम कर रही है, उससे संभावना है कि संसद के शीतकालीन सत्र में इसकी रिपोर्ट पेश की जा सकती है।

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