'जब तक कोई ठोस मामला न आए, कोर्ट दखल नहीं कर सकती', वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पढ़ें हर अपडेट
Waqf Amendment Act SC Hearing Update: वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज (20 मई) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने मामले पर सुनवाई की। इस मामले पर आखिरी फैसला आने तक संशोधित कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जानी चाहिए या नहीं..इसपर सुनवाई की गई।
इस केस में मुस्लिम पक्ष के पांच वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, राजीव धवन, सलमान खुर्शीद और हुजैफा अहमदी शामिल हैं। वहीं वक्फ कानून को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के नोडल वकील एजाज मकबूल हैं। कानून का समर्थन करने वाले याचिकाकर्ताओं में राकेश द्विवेदी, मनिंदर सिंह, रंजीत कुमार, रविंद्र श्रीवास्तव और गोपाल शंकर नारायण शामिल हो सकते हैं। आइए जानें सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 15 मई को सुनवाई 20 मई तक टाल दी और कहा कि वह तीन मुद्दों पर अंतरिम निर्देश पारित करने के लिए दलीलें सुनेगी।
वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कौन-कौन?
🔴 वक्फ अधिनियम पर सीजेआई बीआर गवई ने साफ-साफ कहा है कि जब तक कोई ठोस मामला सामने न आए, अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं। बीआर गवई ने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून संवैधानिक माने जाते हैं और जब तक कोई स्पष्ट और गंभीर समस्या न हो, अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।
🔴 सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि दरगाहों में तो चढ़ावा होता है? इसपर कपिल सिब्बल ने कहा, ''मैं तो मस्जिदों की बात कर रहा हूं। दरगाह अलग होता है...मंदिरों में चढ़ावा आता है लेकिन मस्जिदों में नहीं। यही वक्फ बाय यूजर है। बाबरी मस्जिद भी ऐसी ही थी। 1923 से लेकर 1954 तक अलग अलग प्रावधान हुए लेकिन बुनियादी सिद्धांत तो यही है।''
🔴 सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है हमने तीन तय बिंदुओं पर जवाब दे दिया। वहीं मुस्लिम पक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने कहा है कि हमें तो सभी मुद्दों पर दलील रखना है। यह पूरे वक्त संपत्ति का कब्जा का मामला है। कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि इस मामले पर अंतरिम आदेश जारी करने पर सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये कानून असंवैधानिक और वक्फ संपत्ति को कंट्रोल करने वाला है।
🔴 कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, ''2025 अधिनियम अल्पसंख्यक अधिकारों को सीमित करने के लिए प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 का इस्तेमाल करता है। ये अधिनियम, 1958 धर्मनिरपेक्ष है और इसका उद्देश्य कभी भी अल्पसंख्यक अधिकारों को सीमित करना नहीं था।'' उन्होंने तर्क दिया, "हालांकि, 2025 अधिनियम अल्पसंख्यक अधिकारों को सीमित करने के लिए इस कानून का उपयोग करता है।''
🔴 कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि सैकड़ों साल पहले बने वक्फ-बाय-यूजर के निर्माता को हम कैसे जान पाएंगे, भले ही वह पंजीकृत हो? ऐसे रिकॉर्ड हमें कहां मिलेंगे? उन्होंने कहा कि संशोधनों के तहत, अगर कोई मुथवल्ली (वक्फ का प्रबंधक) वक्फ के मूल निर्माता का नाम नहीं बता पाता है, तो उसे छह महीने की कैद और जुर्माना हो सकता है।
🔴 कपिल सिब्बल की दलीलें सुनने के बाद सीजेआई बीआर गवई ने पूछा- अगर कोई वक्फ संपत्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में आ जाती है, तो क्या इससे धर्म का पालन करने का अधिकार खत्म हो जाता है? सीजेआई बीआर गवई ने उदाहरण देते हुए कहा कि खजुराहो स्थित एक मंदिर ASI के संरक्षण में है, फिर भी वहां श्रद्धालु पूजा-पाठ करने जाते हैं। इस पर सिब्बल ने तर्क दिया कि नए कानून के मुताबिक अगर कोई संपत्ति ASI द्वारा संरक्षित घोषित कर दी जाती है, तो उसे वक्फ नहीं माना जाएगा।












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