My Voice- देश भर में व्यापम को रोकना जरूरी है, नहीं तो मरते रहेंगे लोग

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला भाजपा के लिए और शिवराज सिंह के लिए बड़ी चुनौती बन गयी है। एक के बाद एक हो रही मौतों के बीच मजबूरन शिवराज सिंह को इसकी सीबीआई जांच के लिए हाई कोर्ट को पत्र लिखना पड़ गया। वहीं इस मुद्दे पर दिल्ली में पेशे से वकील अभिषेक सिंह ने अपनी राय इस मुद्दे पर रखी।

व्यापम घोटाला मध्य प्रदेश की भर्ती में हो रही गड़बड़ी की शुरुआत 2000 में हई थी। लेकिन 2013 में इस गड़बड़ी ने बड़े घोटाले का रूप ले लिया। लेकिन यहा गौर करने वाली बात यहा है कि इस मामले पर हाय तौबा मची हुई है। जबकि यह मामला एसआईटी और एसटीएफ कर रही है वह भी हाई कोर्ट की देखरेख में जिसका मतलब है कि इस जांच की जानकारी सिर्फ कोर्ट के पास है।

मीडिया में जो बातें फैलायी जा रही हैं वो ये है कि एसआईटी और एसटीएफ सही जांच नहीं कर रही हैं। लेकिन मेरा मानना है कि मीडिया को भी इस मामले में तथ्यों की पूरी जानकारी नहीं है। अगर मीडिया के पास पूरी जानकारी है तो ऐसे में सवाल यह उठता है कि उनके पास यह पूरी जानकारी आयी कहां से।

मीडिया को सूत्रों का सहारा लेकर गलत खबरें नहीं फैलानी चाहिए। वहीं मेरा मानना है कि इस घोटाले की पूरी सच्चाई के लिए इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में सीबीआई के सुपुर्द की जानी चाहिए। वहीं अगर किसी के पास किसी के खिलाफ कोई शिकायत है तो उसके खिलाफ तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट में पेश करना चाहिए।

जितनी जल्दी इस मामले की सच्चाई सामने आयेगी उतनी ही सरकार की छवि के लिए बेहतर होगा। साथ ही सरकार को इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ सभी तथ्यों को सामने लाने में मदद करनी चाहिए। इस घोटाले की सच्चाई को सामने आने में जितना अधिक समय लगेगा उतना ही सरकार की छवि बिगड़ेगी।

वहीं अगर हम हाल में हो रही मौतों पर नजर डालें तो जिस लेडी सब इंस्पेक्टर की मौत हुई है उसका इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। वह सिर्फ व्यापम के जरिए नौकरी में आयी थी। हमें जांच एजेंसियों पर भरोसा रखते हुए उन्हें थोड़ा समय देना चाहिए। साथ ही अन्य राज्यों में भर्ती में हो रहे घोटालों पर नजर डालनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश में 86 में से 54 एसडीएम यादव हैं, 1500 शिक्षकों की भर्ती फर्जी डिग्री के बदौलत हुई है। हमारे देश में सबसे बड़ा व्यापम आरक्षण है और अगर इस व्यापम की ओर नजर नहीं डाली तो ना जाने कितनी प्रतिभायें यूं हीं रोज मरती रहेंगी।

Disclaimer: माई व्यॉयस में प्रकाशि‍त ये विचार वनइंडिया के नहीं, बल्क‍ि हमारे पाठक के हैं। यदि आप अपनी बात रखना चाहते हैं तो वनइंडिया को लिख भेजें [email protected] पर। यदि आपको हिंदी टाइपिंग नहीं आती है तो अपना मोबाइल नंबर ई-मेल करें, हम आपको कॉल करके आपके विचार लेकर प्रकाशित करेंगे।

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