Vote-from-Home क्या है ? चुनाव आयोग ने 80 साल से अधिक के बुजुर्गों को दिया नया विकल्प
चुनाव आयोग ने अब 80 साल से अधिक उम्र के मतदाताओं को घर से मतदान करने का विकल्प दिया है। इन उम्रदराज मतदाताओं में जिन्हें लगेगा कि वह मतदान केंद्र पर जाने में लाचार हैं, वह घर से ही वोट दे सकेंगे।

भारतीय चुनाव आयोग 80 साल से अधिक के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए के लिए वोटिंग का एक नया विकल्प लेकर आया है। ऐसे लोग अब अपने 'घर से मतदान' कर सकेंगे। यह व्यवस्था आने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनावों से ही शुरू हो रही है। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया है कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब चुनाव आयोग ऐसी सुविधा 80 साल और उससे अधिक के मतदाताओं को उपलब्ध करवाने जा रहा है। यही नहीं, चुनाव आयोग दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था करेगा और वोटरों को यह जानने का भी मौका देगा कि क्या उनके उम्मीदवार की पृष्ठभूमि आपराधिक है ?

80 से अधिक के बुजुर्गों को 'घर से मतदान' का विकल्प
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का कहना है कि हालांकि आयोग 80 साल से अधिक के लोगों को मतदान केंद्रों तक आने के लिए प्रोत्साहित करेगा, लेकिन जो लोग ऐसा नहीं कर सकते, वे इस सुविधा (घर से मतदान) का लाभ उठा सकते हैं। सीईसी के मुताबिक घर से मतदान की प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता कायम रखी जाएगी और पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी भी होगी। उन्होंने बताया कि 'जब भी वोटिंग फ्रॉम होम का अभियान चलेगा, सभी राजनीतिक दलों को सूचना दी जाएगी।'

'सक्षम' मोबाइल ऐप का लाभ उठा सकते हैं दिव्यांग वोटर
यही नहीं सीईसी ने कहा है कि दिव्यांगों के लिए 'सक्षम' मोबाइल ऐप लाया गया है, जिसपर लॉगइन करके वह वोटिंग की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। वहीं उम्मीदवारों के लिए 'सुविधा' नाम से एक मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो कि एक ऑनलाइन पोर्टल है और वहां पर नामांकन और हलफनामा भी दायर किया जा सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसके बारे में यह भी बताया कि 'सुविधा' पोर्टल का इस्तेमाल उम्मीदवार सभाओं और रैलियों की अनुमति मांगने के लिए भी कर सकते हैं।'

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'नो योर कैंडिडेट' की भी व्यवस्था
यही नहीं चुनाव आयोग ने 'नो योर कैंडिडेट' (KYC)के नाम से भी एक अभियान शुरू किया है, जो मतदाताओं के हित में है। राजीव कुमार बोले, 'राजनीतिक दलों को मतदाताओं को अपने पोर्टल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह बताना होगा कि उन्होंने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट क्यों दिया।'

कर्नाटक में 80 से अधिक के 12.15 लाख वोटर
इसके अलावा आने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनावों के संबंध में उन्होंने बताया कि राज्य की 224 सीटों में से 36 सीटें अनुसूचित जातियों और 15 अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 5.21 करोड़ मतदाताओं में से 2.59 करोड़ महिला मतदाता हैं। राज्य में 16,976 से ज्यादा वोटरों की उम्र सौ साल के पार है, जबकि 80 से अधिक उम्र के 12.15 लाख वोटर हैं। इनके अलावा दिव्यांग वोटरों की संख्या भी 5.55 लाख है।

24 मई तक है मौजूदा कर्नाटक विधासभा का कार्यकाल
कर्नाटक में इस बार 4,699 वोटर थर्ड जेंडर वाले हैं और 9.17 लाख वोटरों को पहली बार मतदान करने का मौका मिलेगा। जब मुख्य चुनाव आयुक्त से कर्नाटक में चुनाव की संभावित तारीख पर सवाल किया गया तो वे बोले कि राज्य की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 24 मई को खत्म हो रहा है। यानि इससे पहले चुनाव करा लिए जाएंगे। वैसे चुनाव आयोग कर्नाटक में चुनाव तैयारियों में जुट चुका है।













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