विरल आचार्य बने भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर, जानिए इनके बारे में 10 बड़ी बातें
विरल आचार्य को भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के पद पर नियुक्त किया गया है। उर्जित पटेल के गवर्नर बनने के बाद यह पद खाली हो गया था, जिसे विरल आचार्य ने भर दिया है।
नई दिल्ली। सरकार ने विरल आचार्य को इस पद पर नियुक्त किया है। बुधवार को जारी एक बयान के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक ने विरल आचार्य को तीन साल के लिए डिप्टी गवर्नर के पद के लिए चुना है। आपको बताते चलें कि भारतीय रिजर्व बैंक में कुल चार डिप्टी गवर्नर होते हैं। जब से विरल आचार्य को इस पद के लिए चुना गया तभी से लोग इनके बारे में जानना चाहते हैं कि आखिर ये कौन हैं। हालांकि, अभी तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि आखिर सरकार उन्हें किस पोर्टफोलियो में रखने वाली है। अगर आपने भी विरल आचार्य के बारे में नहीं सुना है और जानना चाहते हैं कि यह कौन हैं तो आइए जानते हैं इनके बारे में कुछ खास बातें।

- विरल आचार्य 2008 से न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। वह स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में पढ़ाते हैं।
- इससे पहले आचार्य लंदन बिजनेस स्कूल से प्राइवेट इक्विटी इंस्टीट्यूट के फाइनेंस एंड एकेडमी डायरेक्टर थे।
- उर्जित पटेल के भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर बनने की वजह से यह पद खाली हो गया था, जिसे विरल आयार्य ने भर दिया है।
- विरल आचार्य के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक के अन्य तीन डिप्टी गवर्नर के नाम- रामा सुब्रमण्यम गांधी, एसएस मुंद्रा और एनएस विश्वनाथन हैं।
- 2014 में वह सेबी के तहत एकेडमिक काउंसिल ऑफ द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स के सदस्य भी रहे हैं।
- उन्होंने 1995 में आईआईटी मुंबई से कम्प्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।
- आचार्य न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से 2001 में फाइनेंस में पीएचडी भी कर चुके हैं।
- इसके अलावा विरल आचार्य के पास बैंक ऑफ इंग्लैंड में भी काम करने का अनुभव है।
- इनके पोर्टफोलियो में बैंक, कॉरपोरेट फाइनेंस और क्रेडिट रिस्क के रिसर्च वर्क शामिल हैं।
- वह बैड लोन ने निपटने के लिए बैड बैंक बनाए जाने के समर्थक रहे हैं।












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