Twitter पर आतंकवादी संगठनों से 'ब्लड मनी' लेने का आरोप, बीजेपी नेता की देशद्रोह का चार्ज लगाने की मांग
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता विनीत गोयनका ने रविवार को कहा कि अमेरिकी सोशल मीडिया दिग्गज कंपनी ट्विटर, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से पैसा लेता है। ये वही आतंकी हैं जो भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने में शामिल रहे हैं। भाजपा के सूचना और प्रौद्योगिकी (आईटी) सेल के एक राष्ट्रीय सह-संयोजक विनीत गोयनका ने एक ऑनलाइन पैनल चर्चा के दौरान दावा करते हुए ट्विटर पर बड़ा आरोप लगाया है।

नागरिकों के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देता है ट्विटर
इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, विनीत गोयनका ने आगे कहा कि ट्विटर इस देश के नागरिकों के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देने वाले आतंकवादी संगठनों से गुप्त तरीके से पैसे लेता है। विनीत गोयनका ने पूछा कि क्या हम किसी ऐसे व्यक्ति को बर्दाश्त करेंगे जो अलगाववाद के कारण को बढ़ावा देने के लिए ब्लड मनी लेगा? गोयनका के इस आरोप के बाद से बवाल मच गया है।

ट्विटर देता है खालिस्तानी विचारधारा को बढ़ावा
गोयनका ने कहा कि वह ट्विटर पर ट्रेंड होने वाले 'हैशटैग खालिस्तान 2020' के प्रचार की जांच कर रहे थे जिसमें उन्हें कई बड़े सबूत मिले। उन्होंने कहा, इस ट्रेंड को यूएस-आधारित समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) द्वारा समर्थित किया जा रहा था, जो एक अलगाववादी संगठन है। यह संगठन सिख के लिए एक अलग देश की मांग करता है। गोयनका ने अपनी टिप्पणी के दौरान, सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी के व्यवहार को विनियमित करने के लिए कठोर कदम उठाने का आह्वान किया।

ट्विटर में पारदर्शिता की कमी
गोयनका ने ट्विटर में पारदर्शिता की कमी और भारतीय उपयोगकर्ताओं की चिंताओं के प्रति उदासीन होने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अधिकारियों को ट्विटर इंडिया के कर्मचारियों के खिलाफ राजद्रोह के आरोपों को लागू करना शुरू करना चाहिए। ऐसे कर्मचारी 'देश विरोधी' सामग्री के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल हैं। गोयनका ने ट्विटर पर एक्टिव फेक अकाऊंट और केवाईसी मानदंडों की शुरूआत सहित ट्विटर उपयोगकर्ताओं के लिए सख्त जांच प्रक्रियाओं की भी मांग की है।

देश के नागरिकों को आना चाहिए आगे
भाजपा नेता ने सवाल किया कि सिलिकॉन वैली में अपनी सार्वजनिक नीति टीमों में काम करने वाले लोगों में 'कोई पारदर्शिता' क्यों नहीं थी। उन्होंने कहा, 'जब अनुयायियों की संख्या की बात आती है तो कोई पारदर्शिता नहीं है।' गोयनका ने कहा कि जब भी कानून का उल्लंघन होता है तो भारतीय नागरिकों को अदालतों और अन्य एजेंसियों के दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा, नागरिकों को अपनी चिंताओं को उजागर करने के लिए एफआईआर, अदालती मामले, ई-शिकायत और यहां तक कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आंदोलन में शामिल होना चाहिए।
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