Assembly Election 2024: हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में 90-90 सीटें, फिर J&K में ही क्यों 3 चरणों में मतदान?
Assembly Election 2024: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने शुक्रवार (16 अगस्त) को हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी है। लोकसभा चुनावों के बाद पहली बड़ी राजनीतिक लड़ाई है। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे एक दशक में पहली बार और क्षेत्र के विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद आयोजित किए जा रहे हैं।
खास बात यह है कि हरियाणा और जम्मू कश्मीर में 90-90 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन जम्मू कश्मीर को ही सिर्फ तीन चरण मतदान के लिए दिए हैं। हरियाणा में एक चरण में यानी 1 अक्टूबर को आयोजित करने जा रहा है। इससे साफ है कि आयोग का जम्मू कश्मीर पर सबसे ज्यादा फोकस किया है। आइए जानते हैं आयोग के इस फैसले के पीछे के कारण?

8 प्वाइंट्स में समझें जम्मू-कश्मीर को क्यों मिले मतदान के लिए 3 चरण?
- दुर्गम इलाकों में पहुंच: जम्मू-कश्मीर के कई विधानसभा क्षेत्र अत्यधिक दुर्गम इलाकों में स्थित हैं, जहां पहुंचने के लिए विशेष तैयारी और अतिरिक्त समय की आवश्यकता होती है।
- मौसम की स्थिति: जम्मू-कश्मीर में मौसम का बड़ा प्रभाव पड़ता है, विशेषकर कश्मीर घाटी में। जहां बारिश, बर्फबारी का भारी प्रकोप देखने को मिलता है। चुनाव आयोग को इन हालात को ध्यान में रखकर चुनावी चरणों की योजना बनानी पड़ती है।
- सुरक्षा की स्थिति: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा कारण है, जिसकी वजह से चुनाव कई चरणों में कराए जाते हैं। हाल ही के आंकड़ों पर नजर डालें तो, साफ है कि आतंकियों के लिए जम्मू-कश्मीर पसंदीदा जगह बनी हुई है। घुसपैठ और आतंकी हमलों की भरमार है।
- आतंकवाद और उग्रवाद: जम्मू-कश्मीर लंबे समय से आतंकवाद और उग्रवाद की समस्या से जूझ रहा है। चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। एक साथ सभी क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती करना मुश्किल होता है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से चुनाव कराए जाते हैं।
- सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य: जम्मू-कश्मीर का सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य भी हरियाणा से भिन्न है।
- सांप्रदायिक विविधता: जम्मू-कश्मीर में हिंदू, मुस्लिम, सिख और बौद्ध समुदायों के बीच सांप्रदायिक विविधता है। विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न समुदायों की प्राथमिकताएं और राजनीतिक समीकरण अलग-अलग होते हैं, जिनके चलते चुनाव आयोग को चरणबद्ध चुनाव की योजना बनानी पड़ती है।
- अलगाववादी आंदोलन: जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलनों का भी प्रभाव रहता है। कुछ क्षेत्रों में चुनाव के प्रति असंतोष और विरोध रहता है, जिससे एक साथ चुनाव कराना मुश्किल हो जाता है।
- प्रशासनिक कारण: जम्मू-कश्मीर में मतदान के लिए प्रशासनिक तैयारियों में भी अधिक समय लगता है।
एक नजर में समझें जम्मू कश्मीर का समीकरण
- कुल सीट-90
- एससी सीट-07
- एसटी सीट-09
- जम्मू क्षेत्र में सीटें-43
- कश्मीर क्षेत्र में सीटें-47
जम्मू कश्मीर में कुल मतदाता?
- कुल मतदाता-88,66,704
- सामान्य मतदाता-87,90,870
- सर्विस मतदाता -75,834
- 18-19 वर्षीय मतदाता-4,27,813
- थर्ड जेंडर मतदाता-167
- 85 साल से अधिक के मतदाता- 69,974
जम्मू कश्मीर में मतदान केंद्र
- कुल मतदान केंद्र-11838
एक नजर में समझें हरियाणा का समीकरण
- कुल सीट-90
- एससी सीट-17
- एसटी सीट-0
हरियाणा में कुल मतदाता?
- कुल मतदाता-2,03,00,255
- सामान्य मतदाता-2,01,90,184
- सर्विस मतदाता -1,10,071
- 18-19 वर्षीय मतदाता- 4,70,460
- थर्ड जेंडर मतदाता-455
- 85 साल से अधिक के मतदाता- 2,46,207
हरियाणा में मतदान केंद्र
- कुल मतदान केंद्र-20629












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