VP Election 2025: NDA उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन बनें उपराष्ट्रपति, विपक्ष ने कहा- यह विचारधारा की लड़ाई है

Vice Presidential Election 2025: देश के नए उपराष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने जीत दर्ज की। इस मौके पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।

विपक्षी दलों ने जहाँ वोट प्रतिशत में आई बढ़ोतरी को "परिवर्तन का संकेत" बताया, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नए उपराष्ट्रपति को शुभकामनाएँ दीं लेकिन साथ ही केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक परंपराओं को दबाने का आरोप लगाया।

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Opposition INDIA Bloc Reacts: कांग्रेस का दावा - विपक्ष मजबूत हो रहा है

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने चुनाव परिणामों को विपक्ष के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, "इस बार विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को कुल 40% वोट मिले, जबकि पिछली बार विपक्षी उम्मीदवार को केवल 26% वोट मिले थे। यानी 14% की बढ़ोतरी हुई है। इसका साफ मतलब है कि विपक्ष लगातार मज़बूत हो रहा है और आने वाले समय में बदलाव होगा।"

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा - "यह विचारधारा की लड़ाई है"

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सी.पी. राधाकृष्णन को जीत की बधाई दी, लेकिन साथ ही कई तीखे सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, "यह केवल चुनाव नहीं था बल्कि विचारधारा की लड़ाई थी। हम श्री बी. सुदर्शन रेड्डी गरु के संघर्ष और सैद्धांतिक लड़ाई के लिए आभारी हैं। यह चुनाव हमें याद दिलाता है कि अधिनायकवादी प्रवृत्तियों वाली सरकारों को रोकना ज़रूरी है, ताकि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।"

खरगे ने नए उपराष्ट्रपति से अपेक्षा जताई कि वे संसदीय परंपराओं का पालन करेंगे और विपक्ष को भी बराबर सम्मान और स्थान देंगे। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति का पद निष्पक्ष और स्वतंत्र रहकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे को "अस्पष्ट और अपमानजनक" बताते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग की।

शक्ति सिंह गोहिल का बयान

कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि इस चुनाव में विपक्ष को 300 वोट मिले लेकिन दुर्भाग्यवश 15 वोट खारिज कर दिए गए। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया की खामी बताते हुए कहा कि बावजूद इसके विपक्ष की ताकत पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत हुई है।

उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजों ने जहाँ एनडीए को जीत दिलाई, वहीं विपक्ष ने भी अपने वोट प्रतिशत में बढ़त को "जनता के मूड में बदलाव" का संकेत बताया। तेजस्वी यादव, इमरान मसूद और मल्लिकार्जुन खरगे के बयान स्पष्ट करते हैं कि विपक्ष इस हार को महज चुनावी हार नहीं मान रहा बल्कि आने वाले समय के लिए इसे "लोकतांत्रिक संघर्ष का नया अध्याय" बता रहा है।

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