क्यों खामोश हैं NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन? फिलहाल हैं कहां? चुनाव के नजदीक आते ही उठे सवाल
CP Radhakrishnan (Vice President Election 2025): भारत के उपराष्ट्रपति पद का चुनाव 9 सितंबर 2025 को होना है, लेकिन NDA के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने जैसे 'पर्दा' डाल लिया हो। न मीडिया में बयान, न इंटरव्यू, न कहीं सार्वजनिक उपस्थिति-यहां तक कि तमिलनाडु, जहां से वे आते हैं, वहां भी उनका कोई खास हलचल दिखाई नहीं दे रही।
ये खामोशी और 'अदृश्य रणनीति' और भी हैरान करने वाली इसलिए लगती है क्योंकि NDA ने उनका नाम तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने और गोंडर जाति को साधने के लिए आगे किया था। लेकिन ना तो "तमिल प्राइड" का नारा सुनाई दे रहा है, ना ही "माटी का बेटा" वाला भाव दिख रहा है। दूसरी तरफ विपक्षी इंडिया गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी मीडिया में बयान देकर सुर्खियों में छाए हुए हैं।

INDIA गठबंधन का उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी एक्टिव
इसके उलट, INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी ने चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और उम्र में बड़े होने के बावजूद, वे राज्यों का दौरा कर रहे हैं, विधायकों से मिल रहे हैं, मीडिया को इंटरव्यू दे रहे हैं और यहां तक कि NDA के MPs तक से समर्थन मांग रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से सीपी राधाकृष्णन को डिबेट की चुनौती भी दी और कहा -"मेरा प्रतिद्वंद्वी नजर ही नहीं आता, बोलता ही नहीं।"
बी. सुदर्शन रेड्डी ने सीपी राधाकृष्णन को दी डिबेट की चुनौती
बी. सुदर्शन रेड्डी ने हैदराबाद में मीडिया से कहा,
"मेरा प्रतिद्वंद्वी दिखाई नहीं दे रहा है। वह बोलता नहीं है। पता नहीं वह कहां है, क्या कर रहा हैं।" सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा प्रतिद्वंद्वी के बारे में अपमानजनक बातें कहने का नहीं है, बल्कि वह उसके साथ एक हेल्दी डिबेट चाहते हैं। बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा, "मैं हर दिन मीडिया से बात कर रहा हूं, अगर वह (राधाकृष्णन) भी बोलते तो एक स्वस्थ बातचीत हो सकती थी।"
क्या सीपी राधाकृष्णन को प्रचार की नहीं है जरूरत?
तो सवाल उठना लाजमी है -क्या NDA को अपने नंबरों पर इतना भरोसा है कि उन्हें उम्मीदवार को प्रचार में उतारने की जरूरत ही नहीं लग रही? राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि चूंकि उपराष्ट्रपति चुनाव में सिर्फ सांसद वोट डालते हैं और NDA के पास बहुमत है, शायद पार्टी ने उम्मीदवार को राज्यों में घुमाने की जहमत ही नहीं उठाई। लेकिन क्या यह रणनीति सही है?
सीपी राधाकृष्णन की तमिलनाडु में 'गायब मौजूदगी' और भी चौंकाने वाली है, क्योंकि उनकी उम्मीदवारी को बीजेपी की तमिलनाडु आउटरीच रणनीति और गोंडर जाति को साधने का हिस्सा माना जा रहा था। डीएमके ने पहले ही अपने विधायकों का समर्थन INDIA गठबंधन के उम्मीदवार को देने का ऐलान कर दिया है, इसलिए शायद बीजेपी को यह कवायद बेकार लगी होगी। लेकिन फिर भी 'माटी का बेटा' और 'तमिल प्राइड' जैसे नारे के बावजूद यह खामोशी और चुप्पी अजीब और अनसुलझी पहेली जैसी लगती है।
राज्यसभा, जिसे 'परिषद् ऑफ स्टेट्स' कहा जाता है, उसके अध्यक्ष बनने वाले शख्स का जनता और राज्यों के बीच अदृश्य रहना क्या उचित है? यही चिंता अब राजनीति के जानकार भी जता रहे हैं।
आखिर कहां हैं सीपी राधाकृष्णन?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक राजनीतिक पर्यवेक्षक का कहना है कि शायद सीपी राधाकृष्णन सिर्फ NDA के सांसदों से 'गुपचुप' मुलाकात कर रहे हों। क्योंकि उपराष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्य वोट डालते हैं, ऐसे में NDA को यह जरूरी नहीं लगा होगा कि उन्हें राज्यों में दिखाया-घुमाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि NDA को अपने आंकड़ों पर भरोसा है, उन्हें जीत पक्की लग रही है और शायद इसी आत्मविश्वास में उन्होंने पहले ही जीत मान ली है।
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