Vice President Election इतना पेचीदा क्यों है? सांसदों को क्यों दी गई ट्रेनिंग, आखिर किस बात का होता है खतरा
Vice President Election 2025 (CP Radhakrishnan vs B Sudarshan reddy): भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव सिर्फ एक साधारण वोटिंग प्रक्रिया नहीं है। यह चुनाव इतना जटिल है कि संसद के सांसदों को बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि मतदान के दौरान कोई तकनीकी गलती न हो और वोट रद्द न हो जाए।
9 सितंबर 2025 को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले NDA और I.N.D.I.A. दोनों खेमों ने अपने सांसदों को वोटिंग प्रक्रिया समझाने के लिए विशेष अभ्यास सत्र यानी Mock Poll आयोजित किए थे। NDA ने इस बार सीपी राधाकृष्णन और INDIA ब्लॉक ने जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन बड़ा सवाल है -आखिर उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसा क्या पेच है कि सांसदों को ट्रेनिंग लेनी पड़ती है? आइए समझते हैं।

उपराष्ट्रपति चुनाव में सांसदों की ट्रेनिंग क्यों जरूरी है?
उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति चुनाव में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम (Single Transferable Vote) का इस्तेमाल होता है।
सांसदों को बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों की प्राथमिकता (Preference) लिखनी होती है। यानी वे सिर्फ "हाँ" या "ना" में वोट नहीं डालते, बल्कि यह बताते हैं कि किस उम्मीदवार को वे पहली, दूसरी या तीसरी पसंद देते हैं।
अगर कोई सांसद यह प्रक्रिया सही से नहीं समझता, तो उसका वोट अवैध (Invalid) हो सकता है। पहली बार सांसद बने नेताओं को इस प्रणाली की पूरी जानकारी नहीं होती। इसी वजह से NDA और I.N.D.I.A. दोनों खेमों ने अपने सांसदों के लिए पोल ड्रिल (Poll Drill) कराई है।
केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने साफ कहा, "बहुत से सांसद पहली बार चुने गए हैं, उन्हें यह तक नहीं पता कि वोट बैलेट से होगा या मशीन से। इसलिए ट्रेनिंग जरूरी है ताकि वोटिंग के दिन कोई गलती न हो।"
✅ भारत में उपराष्ट्रपति कैसे चुने जाते हैं?
- भारत के संविधान के अनुच्छेद 66(1) के तहत उपराष्ट्रपति का चुनाव होता है।
- चुनाव गुप्त मतदान (Secret Ballot) से होता है, यानी सांसद अपनी पसंद किसी दबाव के बिना दर्ज कर सकते हैं।
- इस चुनाव में सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट डालते हैं।
- वोटिंग प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट पद्धति से होती है।
- वोट डालेन की प्रक्रिया के लिए सांसद उम्मीदवारों को प्राथमिकता क्रम में अंकित करते हैं (1, 2, 3...).
- जीतने के लिए उम्मीदवार को एक निश्चित कोटा (Quota) हासिल करना पड़ता है।
- अगर पहले राउंड में कोई उम्मीदवार यह कोटा हासिल नहीं करता, तो सबसे कम वोट पाने वाले को बाहर कर दिया जाता है।
- बाहर हुए उम्मीदवार के वोट दूसरे उम्मीदवारों में बांट दिए जाते हैं, सांसद की अगली प्राथमिकता के हिसाब से।
- यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार जरूरी कोटा पार नहीं कर लेता।
✅ भारत में राष्ट्रपति चुनाव कैसे अलग है?
- राष्ट्रपति चुनाव और भी जटिल होता है, क्योंकि इसमें सांसदों के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं के विधायक भी वोट डालते हैं।
- विधायक के वोट का वजन (Value of Vote) उस राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करता है।
- सांसदों के वोट की वैल्यू अलग से तय की जाती है, ताकि राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन बना रहे।
- यही कारण है कि राष्ट्रपति चुनाव में गणित और भी कठिन हो जाता है।
✅ क्यों कहा जाता है उपराष्ट्रपति चुनाव को पेचीदा?
साधारण चुनावों की तरह सिर्फ बहुमत हासिल करना काफी नहीं होता। सांसदों को प्राथमिकता क्रम में सही वोट डालना होता है। एक छोटी सी गलती-जैसे बैलेट पेपर पर गलत निशान लगाना-पूरे वोट को रद्द कर सकती है। इसलिए सांसदों को वोटिंग से पहले ट्रेनिंग देकर प्रक्रिया समझाई जाती है।
भारत का उपराष्ट्रपति न सिर्फ देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है, बल्कि वह राज्यसभा का चेयरमैन भी होता है। ऐसे में यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
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