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Rajasthan Assembly Elections 2018: मझधार में फंसीं वसुंधरा राजे, सामने है दोहरी चुनौती

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    Rajasthan Elections : Vasundhara Raje के सामने दोहरी चुनौती, कैसे होगी नैया पार | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सत्ता को हासिल करने की बड़ी चुनौती है। एक तरफ जहां भाजपा पिछले कई बार के इतिहास को तोड़कर दोबारा सत्ता में आने की कोशिश में जुटी है तो दूसरी तरफ कांग्रेस प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाकर भाजपा को सत्ता से बाहर करने में पूरी ताकत झोंक रही है। सियासी पंडितों की मानें तो इस बार राजस्थान में भाजपा की हालत थोड़ी कमजोर है, ऐसे में कांग्रेस की सत्ता में वापस की अटकलें तेज हो गई हैं। लेकिन इन तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक रही हैं।

    परंपरागत सीट से ही लड़ेंगी चुनाव

    परंपरागत सीट से ही लड़ेंगी चुनाव

    कयास लगाए जा रहे थे कि सत्ता विरोधी लहर के चलते वसुंधरा राजे अपनी परंपरागत सीट की बजाए किसी दूसरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए वसुंधरा राजे ने झालरापाटन की सीट से ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया और 17 नवंबर को यहां से नामांकन दाखिल किया था। गौर करने वाली बात यह है कि इस सीट से वसुंधरा राजे 2003 से लगातार अजेय रही हैं। लेकिन इस बार उनका सामना यहां काफी कड़ा होने वाला है।

    काफी खींचतान

    काफी खींचतान

    मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ कांग्रेस ने मानवेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है, ऐसे में इन दोनों दिग्गज नेताओं के आमने-सामने आने से इस सीट पर यह मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। दरअसल मानवेंद्र सिंह और वसुंधरा राजे के परिवार के बीच खींचतान काफी लंबे समय से चली आ रही है, लिहाजा माना जा रहा है कि इस बार का चुनाव दिलचस्प हो सकता है। लोगों का मानना है कि एक तरफ जहां यह चुनाव राजे के लिए स्वाभिमान की लड़ाई है तो दूसरी तरफ मानवेंद्र सिंह के लिए यह बदले का चुनाव है।

    राजे के सामने दोहरी चुनौती

    राजे के सामने दोहरी चुनौती

    जिस तरह से वसुंधरा राजे इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं उसने उनकी मुश्किल को बढ़ा दिया है। दरअसल एक तरफ जहां राजे पर प्रदेश में पार्टी की जीत को सुनिश्चित करना है तो दूसरी तरफ उन्हें अपनी सीट को भी बचाना अहम है। ऐसे में वसुंधरा राजे को दो तरफ अपना ध्यान केंद्रित करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उनका यह चुनावी अभियान काफी मुश्किल साबित हो रहा है। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि आने वाले चुनाव के नतीजे किस ओर इशारा करते हैं।

    इसे भी पढ़ें- Rajasthan Assembly Elections 2018: भिंडी से लेकर फूलगोभी और अनानास से लेकर नाशपाती तक मिले चुनाव चिन्‍ह

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