Vande Mataram New Rules: सावधान! अब वंदे मातरम के सम्मान में जरा सी चूक पड़ेगी भारी, क्या है सरकार की तैयारी?
Vande Mataram New Rules: भारत में जल्द ही 'वंदे मातरम' को लेकर नियम बदलने वाले हैं। अब तक हम केवल राष्ट्रगान (जन गण मन) बजने पर ही कड़े प्रोटोकॉल और कानूनी बाध्यता का पालन करते थे, लेकिन अब केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी वही दर्जा और सम्मान दिलाने की तैयारी में है।
दरअसल, गृह मंत्रालय की एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद यह खबर सामने आई है कि अब राष्ट्रीय गीत के अपमान पर भी कानूनी गाज गिर सकती है।

Vande Mataram: क्या बदल जाएगा देश का पुराना नियम?
वर्तमान में भारत के संविधान में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को समान सम्मान प्राप्त है, लेकिन कानूनी तौर पर दोनों में एक बड़ा अंतर है। राष्ट्रगान बजने के समय खड़ा होना अनिवार्य है और इसका अपमान करने पर राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत सजा का प्रावधान है। वहीं, 'वंदे मातरम' को लेकर अभी तक कोई लिखित निर्देश या अनिवार्य प्रोटोकॉल नहीं था। सरकार अब इसी 'कानूनी खाई' को पाटने की योजना बना रही है, ताकि वंदे मातरम को भी राष्ट्रगान जैसा ही प्रोटोकॉल मिल सके।
MHA High-Level Meeting: गृह मंत्रालय की बैठक में क्या हुआ?
हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में एक विशेष बैठक बुलाई थी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा राष्ट्रीय गीत के लिए स्पष्ट नियम और निर्देश तय करना था। सूत्रों के अनुसार, मीटिंग में तीन मुख्य बिंदुओं पर गहन मंथन हुआ:
- 1. क्या वंदे मातरम गाने के समय और स्थान के लिए स्पष्ट नियम होने चाहिए?
- 2. क्या इसके गायन के दौरान राष्ट्रगान की तरह सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य किया जाए?
- 3. क्या राष्ट्रीय गीत का अपमान करने वालों पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान हो?
राष्ट्रीय गीत को लेकर क्या है नया मामला?
राष्ट्रीय गीत को लेकर राजनीति भी गरमाई हुई है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते वंदे मातरम के महत्व को कम किया। विवाद की जड़ 1937 के उस कांग्रेस अधिवेशन में है, जहां गीत के कुछ छंदों को हटा दिया गया था। बीजेपी इसे विभाजन की नींव मानती है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि सरकार आगामी चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को नया रंग दे रही है। हालांकि, अदालतों में कई याचिकाएं दाखिल होने के बाद अब सरकार इसे एक कानूनी ढांचे में पिरोने के लिए गंभीर नजर आ रही है।
The Golden History: आजादी के आंदोलन की रूह बना यह गीत
'वंदे मातरम' का इतिहास उतना ही पुराना और गहरा है जितना कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम। इसकी रचना साल 1870 में महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जिसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) में शामिल किया गया। यह महज एक गीत नहीं, बल्कि गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारत के लिए 'मुक्ति का मंत्र' बन गया था।
पहली बार वंदे मातरम कब गाया गया?
साल 1896 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाकर राजनीति के मंच पर प्रतिष्ठित किया। 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान तो 'वंदे मातरम' ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बना। उस समय इसके उद्घोष मात्र से ही अंग्रेजों के पसीने छूट जाते थे। आज जब सरकार इसके लिए नए नियम बनाने की तैयारी में है, तो संभवत: इसके पीछे का असल मकसद उसी ऐतिहासिक स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा को पुनर्जीवित करना होगा।












Click it and Unblock the Notifications