वैशाली से 'छक्का' लगाने की फिराक में रघुवंश

बिहार के इसी क्षेत्र में लिच्छवियों ने वैशाली गणराज्य की स्थापना की थी। संसदीय प्रणाली से चलने वाली उसी शासन व्यवस्था का आधुनिक रूप आज दुनिया के कई देशों में फलफूल रहा है। वैशाली संसदीय क्षेत्र में वैशाली जिले का केवल एक वैशाली विधानसभा क्षेत्र आता है जबकि मुजफ्फरपुर जिले के पांच विधानसभा क्षेत्र महनापुर, कांटी, बरुराज, पारू और साहेबगंज आते हैं।
वर्ष 1977 के पहले इस क्षेत्र पर कांग्रेस का परचम लहराया करता था, लेकिन कलांतर में कांग्रेस का वर्चस्व यहां खत्म होता गया और समाजवादियों का दबदबा कायम होता गया। इस क्षेत्र के मतदाताओं ने 1989 के बाद से जनता दल के उम्मीदवारों को ज्यादा बार मौका दिया और दिग्विजय सिंह यहां से छह बार सांसद चुने गए।
अब उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह भी यहां से 'छक्का' मारने की तैयारी में हैं। वे 1996 से अब तक लगातार पांच बार इस गढ़ पर अपना कब्जा बनाए हुए हैं। परंतु इस बार उनके लिए यह चुनावी मैदान आसान नहीं लग रहा है।
इस चुनावी मैदान में कई नए खिलाड़ी अपने जातीय समीकरण की 'गुगली' से उनका छक्का रोकने के फेर में जुटे हैं। उनकी ताकत राजपूत, यादव और मुस्लिम मतदाताओं को माना जा रहा है। जनता दल (युनाइटेड) ने यहां से विजय सहनी को, जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने बाहुबली रामकिशोर सिंह उर्फ रामा सिंह को उतारा है।
पिछले चुनाव में रघुवंश प्रसाद सिंह ने जद (यू) के बाहुबली विजय कुमार शुक्ल उर्फ मुन्ना शुक्ला को 22 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। इस बार मुन्ना जेल में हैं। उनकी पत्नी और जद (यू) की विधायक अन्नू शुक्ला को पार्टी ने टिकट नहीं दिया और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरी हुई हैं। उनके चुनाव में उतरने से सभी राजनीतिक दलों का गणित गड़बड़या सा दिख रहा है।
लोजपा के समर्थकों का मानना है कि लोजपा के प्रत्याशी राजपूत हैं और उन्हें अन्य सवर्ण मतदाताओं का भी समर्थन है। इस क्षेत्र में हालांकि भूमिहार मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं, लोजपा को यकीन है कि इस समाज का वोट भी उन्हें मिलेगा। इधर, जद (यू) के निशाने पर जहां पिछड़े वर्ग के मतदाता हैं वहीं उनकी नजर राजद के वोट बैंक पर भी टिकी है। ऐसे में इस बार वैशाली में लोकसभा चुनाव का परिणाम दिलचस्प होने की उम्मीद है।
मुजफ्फरपुर के पत्रकारों का कहना है कि भले ही सभी दलों के प्रत्याशी अपने स्वजातीय मतदाताओं पर भरोसा जमाए बैठे हैं, लेकिन सही मायने में इस चुनाव के परिणाम को मध्य वर्ग के मतदाता प्रभावित करेंगे। मतदान के प्रतिशत के बढ़ने की स्थिति में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को लाभ मिलने की उम्मीद है।
पत्रकारों का यह भी कहना है कि इस सीट पर अभी तक जो स्थिति उभरी है उसमें चतुष्कोणीय मुकाबले के आसार हैं। ऐसे में किसी भी दल की स्पष्ट बढ़त नजर नहीं आ रही है। मुकाबला कांटे का है। यहां के युवा मतदाता कई समस्याओं को लेकर मुखर दिखते हैं। युवा मतदाता नरेंद्र मोदी की लहर की बात तो जरूर करते हैं लेकिन इस क्षेत्र की समस्याओं को भी उठाना नहीं भूलते।
युवा मतदाताओं का कहना है कि इस क्षेत्र में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं लेकिन सरकार का इस ओर ध्यान नहीं गया है। युवा आज भी रोजगार के लिए पलायन करने को विवश हैं। इस क्षेत्र में अंतिम चरण में 12 मई को मतदान होना है।












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