राहुल गांधी की मानें तो नरेंद्र मोदी के दूत बनकर सईद से मिले वैदिक

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वेद प्रताप वैदिक और हाफिज सईद की मुलाकात केंद्र सरकार व भारतीय दूतावास की जानकारी में हुई है। राहुल ने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि देश का इतना बड़ा पत्रकार पाकिस्तान जाकर एक आतंकवादी से मिले और दूतावास को नहीं पता हो। यही नहीं पाकिस्तान में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने भी इस मुलाकात को अंजाम देने में मदद की है।
राहुल गांधी ने अपने इस बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को भी घेर लिया और कहा कि वैदिक आरएसएस से ताल्लुक रखते हैं, लिहाजा इस मुलाकात के बारे में निश्चित तौर पर आरएसएस के लोगों को भी मालूम होगा।
उधर वैदिक ने सफाई दी है कि उनकी इस मुलाकात से भारत सरकार का कोई ताल्लुक नहीं है। वो अपने एक मिशन पर काम कर रहे हैं, उसी के अंतर्गत वो सईद से मिले थे।
कांग्रेस ने उठाये ये पांच सवाल
- वैदिक को पाकिस्तान वीजा देते वक्त दूतावास में उनका मकसद पूछा गया होगा, तो वहां उन्होंने अगर निजी यात्रा बताया तो इस प्रकार का ढिंढोरा क्यों?
- सईद से मुलाकात करने के बाद अब तक भारत सरकार ने वैदिक से पूछताछ क्यों नहीं की?
- अगर दूतावास का कोई रोल नहीं है, तो नवाज शरीफ से मुलाकात कराने में दूतावास ने भूमिका क्यों अदा की?
- भारत सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश क्यों कर रही है?
- प्रधानमंत्री या गृहमंत्री इस मुलाकात पर कोई टिप्पणी क्यों नहीं कर रहे हैं? उन्हें जवाब देना होगा।












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