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Vaccine for kids: बच्चों को लगने वाली कोवैक्सीन के बारे में सबकुछ जानिए, मंजूरी का रास्ता साफ

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: सेंट्रल ड्रग्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीजीसीआई) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी (एसईसी) ने भारत बायोटेक की पीडियाट्रिक कोविड-19 वैक्सीन बच्चों और किशोरों को दिए जाने का रास्ता अपनी ओर से साफ कर दिया है। अब इसके इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से हरी झंडी मिलनी है। भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर ने कंपनी को इस साल मई में ही 2 से 18 साल के बच्चों और किशोरों में इस वैक्सीन के ट्रायल को मंजूरी दी थी और उसने पिछले सितंबर महीने में ही इसे पूरा भी कर लिया था और ट्रायल रिजल्ट के आंकड़ों को विश्लेषण के लिए डीजीसीआई को सौंप दिया था। यह एक स्वदेशी वैक्सीन है, जिसकी खुराक व्यस्कों को पहले से ही दी जा रही है।

बच्चों की कोवैक्सीन व्यस्कों जितनी ही सुरक्षित- एक्सपर्ट

बच्चों की कोवैक्सीन व्यस्कों जितनी ही सुरक्षित- एक्सपर्ट

भारत बायोटेक के बच्चों की कोवैक्सीन के 2/3 क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद 6 अक्टूबर को इसकी रिपोर्ट मंजूरी के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया(डीजीसीआई) को सौंपी गई थी। ट्रायल के दौरान 2 से 18 वर्ष की आयु के 525 बच्चों और किशोरों को कोवैक्सीन की खुराक दी गई। अब इसकी इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिलने के बाद 2 साल से ऊपर के बच्चों के लिए यह जल्द ही उपलब्ध होगी। एम्स के एक प्रोफेसर ने कहा है कि बच्चों में भी कोवैक्सीन की सेफ्टी और इम्युनोजेनेसिटी लगभग उतनी है, जितनी 18 साल से अधिक के व्यस्कों में है। एम्स के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉक्टर संजय कुमार राय ने कहा है कि, 'कोवैक्सिन की ट्रायल तीन आयु समूहों पर किया गया। पहले समूह की जांच 12-18 साल के बीच, दूसरे समूह की 6-12 साल के बीच और तीसरे समूह की 2-6 साल के बीच की गई थी।' गौरतलब है कि राय बच्चों पर कोवैक्सीन की ट्रायल के प्रिसिंपल इंवेस्टिगेटर थे।

पहले से भरी हुई सिरिंज वाली वैक्सीन

पहले से भरी हुई सिरिंज वाली वैक्सीन

अभी दुनियाभर में कोरोना की जो वैक्सीन व्यस्कों को लगाई जा रही है, उनमें से ज्यादातर कई डोज वाली शीशियों से सिरिंज में निकालकर दी जाती है। लेकिन बच्चों की कोवैक्सीन के लिए पहले से भरी हुई सिरिंज या प्री-फिल्ड सिरिंज मेकेनिज्म का इस्तेमाल होगा। पहले से भरी हुई सीरिंज की वजह से उच्च-स्तरीय सटीकता होती है, जिससे वह इस्तेमाल के लिए बहुत ही अधिक सुरक्षित मानी जाती है। बच्चों को व्यस्कों की तरह ही 0.5 एमएल वैक्सीन की खुराक ही लगाई जाएगी। यही वजह है कि बच्चों के लिए प्री-फिल्ड सिरिंज का इस्तेमाल होना है, ताकि सिरिंज में डोज लेने में सटीकता के साथ किसी तरह का समझौता न होने पाए। इसके बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया है कि मान लीजिए बच्चा 2 साल का है और उसे गलती से ज्यादा डोज पड़ जाए तो एक अलग समस्या खड़ी हो सकती है।

28 दिन के अंतर पर दो खुराक दी जाएगी

28 दिन के अंतर पर दो खुराक दी जाएगी

बच्चों को कोवैक्सीन की 2 डोज लगेगी और दोनों के बीच 28 दिनों का अंतर होगा। व्यस्कों के लिए सरकार ने कोवैक्सीन की दो डोज के बीच 4 से 6 हफ्तों का अंतर रखने की सलाह दी हुई है। पीडियाट्रिक कोवैक्सीन, वही कोवैक्सीन है जो व्यस्कों को दी जा रही है। लेकिन, फिर भी बच्चों पर इसके इस्तेमाल से पहले अलग से ट्रायल की आवश्यकता थी। जबकि, बड़ों को इस साल 16 जनवरी से ही ये टीके पड़ रहे हैं।

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    बच्चों के लिए बाकी वैक्सीन

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    जायडस कैडिला की तीन खुराक वाली सुई-रहित वैक्सीन जायकोव-डी को इस साल अगस्त में ही आपात उपयोग के लिए मंजूरी मिल गई थी और इसे 12 साल से ऊपर के किशोरों के साथ-साथ व्यस्कों को भी दिया जा सकता है। हालांकि, यह वैक्सीन अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं हो पाई है। उधर, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने भी हाल ही में 7 से 11 साल आयु वर्ग के बच्चों के बीच नोवावैक्स वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया है, जिसे भारत में कोवोवैक्स का नाम दिया गया है।

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