Chamoli Tragedy: ITBP अधिकारी का दावा- तपोवन हाइडल प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह
नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड रविवार को कभी न भूलने वाली त्रासदी से गुजरा। ग्लेशियर टूटने से रौद्र हुई धौलीगंगा ने देखते-देखते चमोली शहर में तांड़व मचा दिया। 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 125 से अधिक लोग लापता हैं। तपोवन में महत्वपूर्ण सुरंग की तस्वीरों से पता चलता है कि पूरा क्षेत्र कीचड़ और मलबे से भर गया है। NTPC के तपोवन-विष्णुगढ़ हाइडल प्रोजेक्ट और ऋषि गंगा हाइडल प्रोजेक्ट को पूरी तरह तबाह हो गया है। ये दोनों जल बिजली परियोजनाएं सैलाब की चपेट में आ गईं।
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एनटीपीसी की तपोवन हाइडल परियोजना की सुरंग पर बचाव अभियान का नेतृत्व करने वाले आईटीबीपी के कमांडिंग ऑफिसर वेणुधर नायक ने कहा कि तपोवन हाइडल प्रोजेक्ट पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होने बताया कि साइट पर कुछ घर गिरने से बच गए हैं लेकिन उनके उपर भी 20 फीट तक कीचड़ जम गया है। नायक ने बताया कि आपदा के बाद से उत्तरी उत्तराखंड में धौलीगंगा नदी के तट पर स्थित ऋषिगंगा छोटी पनबिजली परियोजना और नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन (NTPC) तपोवन परियोजना के से करीब 100 से अधिक लोग लापता हैं।
250 जवानों की टीम लेकर तपोवन परियोजना पर सबसे पहले पहुंचने वाले नायक ने कहा उन्हें सुरंग खोदने में सात घंटे लग गए जहां 12 व्यक्तियों के फंसे होने की खबर थी। नायक ने बताया कि बाढ़ आने के बाद और सुरंग अवरुद्ध होने से पहले कम से कम आठ व्यक्ति बच पाने में सफल रहे। हम सुबह 11.30 बजे पहुंचे और 6.30 बजे तक सभी 12 व्यक्तियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। आपको बता दें कि इंडो तिब्बतियन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल( (NDRF) के कर्मी तपोवन की 250 मीटर लंबी सुरंग के 150 मीटर अंदर तक पहुंच गए हैं।












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