'क्लाउड सीडिंग या बारिश समाधान नहीं...', जंगलों में लगी आग पर SC ने उत्तराखंड सरकार को लगाई फटकार
उत्तराखंड के जंगलों में तेजी से फैलती आग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इस हफ्ते बुधवार को मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए सिर्फ बारिश या फिर क्लाउड सीडिंग पर ही विचार करना पर्याप्त नहीं है। मामले में अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 15 मई की डेट तय की है।
सुप्रीम कोर्ट में पहाड़ों पर फैलती आग को लेकर सख्ती टिप्पणी की है। जंगलों में आग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और याचिकाकर्ताओं को मूल्यांकन और राय के लिए अपनी रिपोर्ट केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) को सौंपने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में उत्तराखंड सरकार और मामले से जुड़े दोनों याचिकाकर्ताओं को अपनी-अपनी रिपोर्ट केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के साथ साझा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आग पर नियंत्रण को उपायों के व्यापक मूल्यांकन को सुविधाजनक बनाना भी अहम है, इससे स्थिति के नियंत्रित करने के प्रयासों की स्पष्ट जानकारी हो सकेगी।
उत्तराखंड सरकार ने जंगल की आग को रोकने के अपने प्रयासों के बारे में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को एक अपडेट दिया। सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि जंगलों में 0.1 प्रतिशत वन्यजीव आग से प्रभावित हुए हैं।
इससे पहले न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अपनी दलीलों में जंगल की आग के लिए मानवीय गतविधियों को जिम्मेदार बताया था। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि पिछले साल नवंबर से, उत्तराखंड में 398 जंगल की आग देखी गई। आग के लिए मानवीय गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।
बता दें कि राज्य सरकार ने पीठ को सूचित किया कि उसने जंगल की आग के संबंध में 350 आपराधिक मामले शुरू किए हैं, जिनमें 62 व्यक्तियों को संदिग्धों के रूप में नामित किया गया है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने कार्यवाही के दौरान एक अंतरिम स्थिति रिपोर्ट भी पेश की।












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