उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017: 40 साल पुराने कांग्रेसी को बीजेपी में लाकर अमित शाह ने खेला बड़ा दांव
यशपाल आर्य अकेले बीजेपी में शामिल नहीं हुए हैं। उनके पुत्र संजीव आर्य और पूर्व कांग्रेस विधायक केदार सिंह रावत भी बीजेपी में शामिल हुए।
नई दिल्ली। उत्तराखंड में जहां एक ओर विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी में घमासान का दौर जारी है। पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं है इसका ताजा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने बीजेपी का दामन थाम लिया।

यशपाल आर्य ने थामा बीजेपी का दामन
यशपाल आर्य 6 बार विधायक रहे हैं, उनकी काबिलियत को देखते हुए ही कांग्रेस पार्टी ने उन्हें दो बार प्रदेश अध्यक्ष का पद सौंपा। यशपाल आर्य करीब 40 सालों से कांग्रेस पार्टी में थे। उन्होंने इस दौरान पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत बनाई। हालांकि अब उन्होंने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया है। उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार के रवैये से खफा होकर उन्होंने ये कदम उठाया।

6 बार विधायक और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं यशपाल आर्य
यशपाल आर्य अकेले बीजेपी में शामिल नहीं हुए हैं। उनके पुत्र संजीव आर्य और पूर्व कांग्रेस विधायक केदार सिंह रावत भी बीजेपी में शामिल हुए। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में तीनों ही नेता भाजपा में शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक यशपाल आर्य ने कांग्रेस छोड़ना का फैसला मुख्यमंत्री हरीश रावत की कार्यशैली और उनकी उपेक्षा से नाराज होकर किया है। यशपाल आर्य की पहचान उत्तराखंड के बड़े दलित नेता के तौर पर है। ऐसे में उनका बीजेपी में जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है।

2016 में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने थामा था बीजेपी का दामन
ये कोई पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस पार्टी के इतने बड़े नेता ने पार्टी का दामन छोड़ा हो। इससे पहले साल 2016 में भी कांग्रेस को करारा झटका लगा था जब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा ने बीजेपी का दामन थामा था। उस समय प्रदेश में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। माना जा रहा है कि यशपाल आर्य के बीजेपी में शामिल होने के पीछे कहीं न कहीं विजय बहुगुणा का अहम योगदान है।

यशपाल आर्य ने साधा सीएम हरीश रावत पर निशाना
यशपाल आर्य के बीजेपी में शामिल होने के पीछे जो भी वजहें हों लेकिन जिस तरह से उन्होंने बीजेपी दामन थामा, कांग्रेस के लिए चुनाव से ठीक पहले ये किसी करारे झटके से कम नहीं है। वैसे भी चुनावी समर के बीच कांग्रेस पार्टी में अंदरुनी कलह कुछ ज्यादा ही नजर आ रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा चुनाव से पहले कई मोर्चों पर रणनीतिक तैयारी करनी पड़ रही है। हरीश रावत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

उत्तराखंड चुनाव से पहले कांग्रेस को करारा झटका
ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि हरीश रावत इस बार के चुनाव को लेकर अपनी रणनीति अलग बना रहे हैं, वहीं पार्टी अपनी अलग रणनीति पर काम कर रही है। इसी को लेकर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता परेशान हैं। यशपाल आर्य के बीजेपी में जाने की अहम वजह यही मानी जा रही है। यशपाल आर्य की ओर से भी ऐसे आरोप लगाए गए हैं कि नए नेता वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की इज्जत नहीं कर रहे हैं।












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