'मैं रोजाना श्रीराम का नारा लगाता हूं..': राम मंदिर के मुद्दे पर क्यों बंट गई समाजवादी पार्टी?
राम मंदिर के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी अपनी उलझनों से अभी तक बाहर नहीं निकल पाई है। इस मुद्दे पर पार्टी के विचार बंटे हुए हैं और यह बात विधानसभा में भी जाहिर हो चुकी है। अलबत्ता, परिवर्तन ये है कि अब पार्टी विधायकों के बड़े तबके का विचार सकारात्मक हो चुका है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा में अयोध्या के पवित्र राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण और वहां भगवान राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसमें प्रमुख विपक्षी दल के भीतर का मतभेद स्पष्ट तौर पर सामने आ गया।

राम मंदिर पर धन्यवाद प्रस्ताव का सपा के 14 एमएलए ने किया विरोध-स्पीकर
इस प्रस्ताव के पास होने के बाद स्पीकर सतीश महाना ने बताया कि दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी विधायकों ने प्रस्ताव का समर्थन किया है, सिर्फ समाजवादी पार्टी के 14 एमएलए ने इसका विरोध किया।
यूपी विधानसभा में सपा प्रमुख विपक्षी पार्टी है और इसके 108 विधायकों में से जानकारी के मुताबिक मतदान के समय करीब 40 विधायक सदन में मौजूद थे।
स्पीकर ने सदस्यों से कहा था, वे विरोध के लिए स्वतंत्र हैं
पहले बसपा से सपा में आए दिग्गज नेता लालजी वर्मा ने यह सवाल उठाया था कि इस तरह के प्रस्ताव की जरूरत ही क्या है। लेकिन, स्पीकर महाना ने कहा कि जो इस प्रस्ताव का समर्थन करना चाहते हैं करें और जो विरोध करना चाहते हैं, वह भी स्वतंत्र हैं।
उन्होंने इसपर वोटिंग का आह्वान करते हुए कहा, 'मुझे नहीं लगता कि इस प्रस्ताव का कोई विरोध करेगा। फिर भी अगर कोई इसके खिलाफ है तो उन्हें अपने हाथ उठाने चाहिए।'
यह प्रस्ताव सदन में सोमवार शाम को ही लाया गया था। ध्वनि मत से पारित इस प्रस्ताव के पक्ष में विपक्ष के अधिकतर सदस्यों ने हाथ उठाया, सिर्फ 14 सपा विधायकों को छोड़कर। हालांकि, इस प्रस्ताव के लिए किसी भी पार्टी की ओर से कोई व्हिप जारी नहीं किया गया था।
दरअसल, सपा के कुछ विधायक इस वजह से प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रहा है, इसलिए प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर पीएम मोदी और सीएम योगी के लिए धन्यवाद प्रस्ताव सदन से पास नहीं होना चाहिए।
स्पीकर ने 11 फरवरी को विधायकों से अयोध्या चलने का किया आह्वान
मंगलवार को स्पीकर सतीश महाना इस मुद्दे पर एक और नए प्रस्ताव के साथ सामने आ गए। उन्होंने सदस्यों से आह्वान किया कि 11 फरवरी को राम लला के दर्शन के लिए अयोध्या चलें। इससे सदन का नजारा और दिलचस्प हो गया।
स्पीकर बोले कि, 'जो भी अयोध्या धाम के दर्शन करना चाहते हैं, सभी के साथ.....एक मैसेज जाएगा.....किसी के लिए कोई बाध्यता नहीं है....।' इस दौरान उन्होंने सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव की उस टिप्पणी का जिक्र किया कि अगर स्पीकर विधायकों को राम मंदिर ले चलें तो वे भी उनके साथ शामिल होंगे।
'साथ-साथ मस्जिद की जगह भी जाया जाए'
बाद में संभल से सपा एमएलए इकबाल महमूद ने कहा कि अगर स्पीकर सभी सदस्यों को राम मंदिर ले जाने के लिए अयोध्या ले जा रहे हैं, तब सभी सदस्यों को उस जगह भी ले जाया जाना चाहिए, जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मस्जिद बननी है।
वे बोले, 'सुप्रीम कोर्ट ने ही मस्जिद के लिए भी जगह दी है। सद्भावना की बात है...साथ-साथ मस्जिद की जगह भी जाया जाए।'
मैं रोजाना राम का नारा लगाता हूं-सपा विधायक
मंगलवार को सपा के एक ऐसे एमएलए भी सामने आए जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध नहीं किया था। प्रश्नकाल के दौरान सपा विधायक स्वामी ओमवेश ने स्पीकर से गुजारिश की कि अगर रिकॉर्ड में उनका नाम विरोध करने वालों में दर्ज है तो उसे ठीक करवाया जाए।
उन्होंने कहा, 'प्रभु श्रीराम के चरणों में नमन करता हूं। कल मैंने समर्थन में हाथ उठाया था....मेरे साथ ज्यादती हुई है....मैं रोजाना राम का नारा लगाता हूं....'












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