सगे भाई ने किया इंकार तो हिन्दू दोस्त ने किडनी देकर बचाई रफी की जान

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नई दिल्ली। बरेली के रहने वाले मंसूर रफी को भाई के इंकार के बाद हिन्दू दोस्त ने किडनी दान की। रफी को डेढ़ साल पहले डॉक्टरों ने ये कह दिया था कि उनकी किडनी खराब हो रही है, ऐसे में उन्हें किसी रिश्तेदार से किडनी की जरूरत होगी। पत्नी का ब्लड ग्रुप नहीं मिलता था और मंसूर रफी के भाईयों ने किडनी देने से इंकार कर दिया लेकिन उनके सालों पुराने हिन्दू दोस्त ने उनके लिए अपनी किडनी देने का फैसला किया और रफी को नई जिंदगी दी।

डेढ़ साल से दिल्ली में करा रहे हैं इलाज रफी

डेढ़ साल से दिल्ली में करा रहे हैं इलाज रफी

45 साल के मंसूर रफी उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले हैं। बीते साल मई में ही दिल्ली में इलाज के दौरान डॉक्टर ने उन्हें बता दिया था कि उनकी किडनी खराब हो चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, दिल्ली के वीपीएस रॉकलैंड अस्पताल के डॉक्टर विक्रम कालरा ने बताया 'मंसूर को लगातार डायलसिस करना पड़ता था। मैंने उन्हें बताया कि उनके लिए किडनी बदलवाना जरूरी है, क्योंकि किडनी ना बदलने से उनकी जिंदगी को भी खतरा हो सकता था। ऐसे में मैंने उनसे पूछा कि क्या उनका भाई, पत्नी या कोई नजदीकी रिश्तेदार उन्हें अपनी किडनी दे सकता है।

 भाई, रिश्तेदार ने किया मना, दोस्त ने दी किडनी

भाई, रिश्तेदार ने किया मना, दोस्त ने दी किडनी

मंसूर रफी ने डॉक्टर को बताया कि उनके भाई और नजदीकी रिश्तेदार किडनी देना नहीं चाहते, बीवी तैयार है लेकिन उसका ब्लड ग्रुप अलग है। रफी ने बताया कि उनका दोस्त है जो किडनी दे सकता है। इस पर डॉक्टर ने कहा कि नजदीकी रिश्तेदार की ही किडनी ली जा सकती है या फिर उसकी जिससे मरीज का काफी भावानात्मक रिश्ता हो। डॉक्टर ने कहा कि अगर ये जाहिर हो कि दान देने वाले से मरीज का भावानात्मक रिश्ता मजबूत है तो फिर ये मुमकिन है।

विपिन ने कहा रफी मेरे गुरू

विपिन ने कहा रफी मेरे गुरू

रफी ने डॉक्टर कालरा को अपने दोस्त विपिन कुमार गुप्ता के साथ अपनी 12 साल पुरानी तस्वीरें दिखाईं। इनमें दोनों के परिवार एक साथ अजमेर स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और बालाजी मंदिर में दिख रहे थे। डॉक्टर ने इसके बाद मामले को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया ताकि ये पता चल सके कि रुपये लेकर तो गुप्ता किडनी नहीं बेच रहे लेकिन जांच में डॉक्टर का ये शक बेबुनियाद साबित हुआ।

किडनी दान की इजाजत देने वाली कमेटी ने तीन बार गुप्ता की किडनी दान करने की याचिका खारिज कर दी। तीसरी बार में उन्हें इजाजत मिली। इसके बाद इस महीने के पहले हफ्ते में विपिन की दान की हुई किडनी रफी को लगा दी गईं । विपिन कुमार का कहना है कि वो और रफी दोनों ही पेशे से ड्राइवर हैं। रफी ने ही उनको गाड़ी चलाना सिखाया इसलिए वो उन्हें गुरू मानते हैं और गुरू के लिए उन्होंने खुशी-खुशी किडनी दान की है।

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English summary
uttar pradesh hindu man donate kidney to muslim friend in bareily
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