Religious Freedom के बहाने अमेरिका ने फिर आंतरिक मामले में नाक घुसाई! भारत ने रिपोर्ट खारिज की
Religious Freedom के हवाले से जारी एक अमेरिकी रिपोर्ट में भारत की निंदा की गई। देश में अल्पसंख्यकों पर कथित हमलों का जिक्र किया गया। भारत ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।

Religious Freedom के नाम पर भारत की आलोचना करने वाली अमेरिकी रिपोर्ट को भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में भारत में अल्पसंख्यकों के साथ कथित तौर पर खराब बर्ताव के आरोप लगाए गए थे।
दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) की धार्मिक स्वतंत्रता के संदर्भ में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कथित तौर पर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले हुए हैं। इसी आधार पर देश की निंदा भी की गई है।
Govt rejects report by US State Department on religious freedom that criticised India for alleged attacks on minorities
— Press Trust of India (@PTI_News) May 16, 2023
धार्मिक आजादी के हवाले से जारी रिपोर्ट के बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने अमेरिकी रिपोर्ट का पुरजोर खंडन किया है। भारत ने इस रिपोर्ट को बिना सत्यापित किए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार, दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक भी करार दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने अमेरिकी रिपोर्ट के बारे में कहा, यह गलत सूचनाओं पर आधारित है। अफसोस की बात हैं कि किसी देश की छवि को प्रभावित करने वाली ऐसी रिपोर्ट सही सूचना पर आधारित नहीं।
Recommended Video
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हम अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी विदेश विभाग की 2022 रिपोर्ट जारी होने से वाकिफ हैं। अफसोस की बात यह है कि इस तरह की खबरें गलत सूचना और त्रुटिपूर्ण समझ पर आधारित होती रहती हैं।'
उन्होंने कहा, रिपोर्ट कुछ अमेरिकी अधिकारियों द्वारा प्रेरित और पक्षपाती टिप्पणी है। इससे ऐसी रिपोर्ट्स की विश्वसनीयता कम होती है। अरिंदम बागची ने कहा, "हम अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को महत्व देते हैं और हमारे लिए चिंता के मुद्दों पर खुलकर आदान-प्रदान करना जारी रखेंगे।"
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी विदेश विभाग की 2022 की रिपोर्ट में भारत में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुसलमानों के खिलाफ मनमानी के आरोप लगे हैं।
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया, "वर्ष के दौरान कई राज्यों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सदस्यों के खिलाफ कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा हिंसा की कई रिपोर्टें आईं। इसमें गुजरात में सादी वर्दी में पुलिस ने अक्टूबर में एक त्योहार के दौरान हिंदू उपासकों को घायल करने के आरोपी चार मुस्लिम पुरुषों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे गए।"
इसी रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने अप्रैल में खरगोन में सांप्रदायिक हिंसा के बाद मुस्लिमों के घरों और दुकानों पर बुलडोज़र चला दिया गया। बता दें कि इस घटना के बाद CM शिवराज सिंह चौहान सरकार की तीखी आलोचना हुई थी।
पर्याप्त आवास, अल्पसंख्यक मुद्दों, और धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता विषय पर जून में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूतों ने सरकार से खरगोन में हुई हिंसा के बाद "दंडात्मक" विध्वंस के बारे में "गंभीर चिंता" व्यक्त की थी। इसमें कहा गया था कि स्थानीय सरकारों ने मुस्लिम अल्पसंख्यकों और कम आय वाले समुदायों को दंडित करने का मनमाने ढंग से आदेश दिया गया था।"
अक्टूबर में, एक नागरिक समिति द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2020 में दिल्ली दंगों में प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर मुस्लिम थे। उनके खिलाफ हिंसक कार्रवाइयों में "स्पष्ट पुलिस मिलीभगत के कई उदाहरण" थे।
रिपोर्ट जारी होने के बाद, अमेरिकी विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि भारत में, देश भर के विभिन्न धार्मिक समुदायों के कानूनी अधिवक्ताओं और पंथ के नेताओं ने हरिद्वार शहर में मुसलमानों के खिलाफ अत्यधिक घृणास्पद भाषण के एक मामले की निंदा की। उन्होंने देश से बहुलवाद और सहिष्णुता की ऐतिहासिक परंपराओं के समर्थन का आह्वान भी किया।
इस बीच, भारत पर अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट पर मीडिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज की रिपोर्ट के बारे में कहा कि नई दिल्ली का नाम और जो रेखांकित किया गया उसे देखकर दुख हुआ है।












Click it and Unblock the Notifications