US India Drone Deal: रक्षा मंत्रालय ने 'महंगे ड्रोन' खरीदने का खंडन किया, कहा- ऐसी खबरों की नीयत में खोट
रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने कहा, अमेरिका से 31 प्रीडेटर ड्रोन (एमक्यू-9बी ड्रोन) की खरीद की कीमत और अन्य शर्तों का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में कुछ अटकलें सामने आईं हैं।
भारत और अमेरिका के रक्षा सौदे के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स को रक्षा मंत्रालय ने गलत उद्देश्य वाला करार दिया। सरकार ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स का मकसद उचित अधिग्रहण प्रक्रिया को पटरी से उतारना है।

रविवार को रक्षा मंत्रालय ने कहा, "सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में कीमत और खरीद की अन्य शर्तों (प्रीडेटर ड्रोन की) का जिक्र करते हुए कुछ अटकलबाजी वाली रिपोर्ट्स सामने आईं। ये अनावश्यक हैं। इसके गलत उद्देश्य हैं।"
ड्रोन की डील के बीच कीमत और अन्य नियम और शर्तों पर रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, खरीद को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। अभी दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है।
31 प्रीडेटर ड्रोन (एमक्यू-9बी ड्रोन) संबंध में रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया, सभी से अनुरोध है कि वे फर्जी खबरें और गलत सूचना न फैलाएं। इससे सशस्त्र बलों के मनोबल पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अधिग्रहण प्रक्रिया पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ड्रोन डील के बारे में समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 15 जून, 2023 को 31 एमक्यू-9बी (16 स्काई गार्जियन और 15 सी गार्जियन) की खरीद को स्वीकृति दी थी।
भारत की तीनों सेनाओं के लिए हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS) के अधिग्रहण के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (AON) विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) मार्ग के माध्यम से दी गई।
अमेरिका से लिए जाने वाले ड्रोन को लेकर हुई डील के लिए AON में मानव रहित एरियल व्हीकल (UAV) की संख्या और संबंधित उपकरणों का ब्यौरा भी शामिल था। इसमें अमेरिकी सरकार द्वारा प्रदान की गई 3,072 मिलियन डॉलर की अनुमानित लागत का उल्लेख है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी सरकार से नीति अनुमोदन मिलने के बाद कीमत पर बातचीत की जाएगी। रक्षा मंत्रालय अधिग्रहण लागत की तुलना जनरल एटॉमिक्स (जीए) द्वारा अन्य देशों को दी जाने वाली सर्वोत्तम कीमत से करेगा।
सरकार ने अटकलों के बीच साफ किया है कि अमेरिकी ड्रोन की खरीद प्रगति पर है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरी भी की जाएगी। FMS के तहत, अमेरिकी सरकार को एक अनुरोध पत्र (LoR) भेजा जाएगा।
इसमें तीनों सेनाओं की जरूरतों, उपकरणों का विवरण और खरीद की शर्तें शामिल होंगी। एलओआर के आधार पर, अमेरिकी सरकार और रक्षा मंत्रालय प्रस्ताव और स्वीकृति पत्र (एलओए) को अंतिम रूप देंगे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उपकरण और खरीद की शर्तों के विवरण पर बातचीत की जाएगी। FMS कार्यक्रम और अमेरिकी सरकार द्वारा प्रस्तावित कीमत और शर्तों के अनुसार डील को अंतिम रूप दिया जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications