'हर सांसद पर खर्च हुए 15-20 करोड़', क्या वोट खरीदकर BJP ने जीता उपराष्ट्रपति चुनाव? विपक्ष का विस्फोटक दावा
Uprashtrapati Chunav 2025: देश की राजनीति में पैसों का दखल कोई नई बात नहीं है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जो सनसनीखेज दावा किया है, उसने उपराष्ट्रपति चुनाव की गरिमा और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्षी खेमे के सांसदों की वोटिंग प्रभावित करने के लिए हर एक सांसद पर 15 से 20 करोड़ रुपये तक खर्च किए।
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि जनता जिन नेताओं पर भरोसा कर संसद तक भेजती है, वही नेता अब 'खरीदे-बेचे जाने वाले माल' बन चुके हैं। उन्होंने कहा -"कुछ सांसदों को शायद खरीदा जा सकता है, लेकिन जनता और उनकी इच्छा को कभी नहीं खरीदा जा सकता।"

उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि BJP पहले भी 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव, महाराष्ट्र और झारखंड में पैसे के दम पर सरकार गिराने और विधायक खरीदने का खेल खेल चुकी है। यही पैटर्न उपराष्ट्रपति चुनाव में भी देखने को मिला।
🔵 उपराष्ट्रपति चुनावी गणित क्या कहता है?
उप-राष्ट्रपति पद के चुनाव में NDA उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार बी. सुधर्शन रेड्डी को 300 वोटों पर संतोष करना पड़ा। कुल 781 सांसदों में से 767 सांसदों ने वोट डाला। इनमें से 15 वोट अमान्य घोषित कर दिए गए।
विपक्ष का दावा था कि उनके पास 315 सांसद चुनाव में मौजूद थे। इस लिहाज से, अगर सभी ने विपक्षी उम्मीदवार को वोट दिया होता, तो अंतर इतना बड़ा नहीं होता। यही वजह है कि अब क्रॉस वोटिंग और पैसे के इस्तेमाल की चर्चा तेज है।
मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए के पास 427 वोट और इंडिया ब्लॉक के पास 315 वोट हैं। इनके अलावा कुल 39 वोट न्यूट्रल माने जाते हैं, जो किसी भी गठबंधन के साथ स्पष्ट रूप से नहीं हैं। इन न्यूट्रल में से वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के 11 सांसदों ने एनडीए का समर्थन कर दिया, जिससे एनडीए की संख्या बढ़कर 438 हो गई, जबकि न्यूट्रल वोट घटकर 28 रह गए।
इन 28 में से बीजेडी के सात सांसद, बीआरएस के चार सांसद, अकाली दल के एक सांसद और दो निर्दलीय सांसद (सरबजीत सिंह खालसा और अमृतपाल) मतदान में अनुपस्थित रहे। यानी कुल 14 वोट एब्सेंट हो गए। इस तरह न्यूट्रल वोट की प्रभावी संख्या घटकर अब केवल 14 रह गई है।

🔵 TMC के अभिषेक बनर्जी ने क्यों जताई आशंका?
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह चुनाव सीक्रेट बैलेट से हुआ, ऐसे में यह साफ-साफ कहना मुश्किल है कि किसने किसके पक्ष में वोट डाला। उन्होंने यह भी स्वीकारा कि कुछ विपक्षी दलों के सांसद BJP की ओर झुकाव रखते हैं।
उन्होंने कहा -"अगर मान भी लें कि 15 वोट अमान्य हुए, और वे सब विपक्ष के ही थे, तो क्रॉस वोटिंग नहीं हुई। लेकिन अगर उनमें से कुछ NDA के भी हों, तो इसका मतलब है कि विपक्ष के कुछ सांसदों ने सचमुच पाला बदला।"
अभिषेक बनर्जी यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी BJP ने विपक्षी दलों के पोलिंग एजेंट्स को 5,000 से 10,000 रुपये तक देने की कोशिश की थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने दिखा दिया कि नेताओं को भले खरीदा जा सके, लेकिन जनता को नहीं।
TMC के इस आरोप ने न सिर्फ उपराष्ट्रपति चुनाव, बल्कि देश की पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर सांसद करोड़ों में बिक सकते हैं, तो जनता का भरोसा और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों ही खतरे में पड़ते हैं। यह साफ है कि विपक्ष TMC के इस दावे को हथियार बनाकर BJP पर हमला तेज करेगा। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से इन आरोपों का खंडन भी जोर-शोर से किया जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications