दोषपूर्ण हिप इंप्लांट को लेकर यूपी के मरीज को 'जॉनसन एंड जॉनसन' देगा एक करोड़ का मुआवजा

नई दिल्ली। अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन भारत में गलत हिप इंप्‍लांट सर्जरी को लेकर लंबे समय से विवादों में है। दोषपूर्ण हिप इंप्लांट को लेकर सरकार ने 'जॉनसन एंड जॉनसन प्रा. लिमिटेड' को एक करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कंपनी को ये मुआवजा उत्तर प्रदेश के एक मरीज को गलत हिप इंप्लांट को लेकर दिया जाएगा। ये अकेला मामला नहीं है इससे पहले यूपी के ही एक और मरीज को गलत हिप इंप्लांट मामले में 90 लाख से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। इस साल मार्च से लेकर अब तक कुल चार मरीजों को मुआवजे का ऐलान किया गया है।

सीडीएससीओ ने दिया आदेश

सीडीएससीओ ने दिया आदेश

भारतीय दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए नियामक संस्था 'सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन' (सीडीएससीओ) ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर जॉनसन एंड जॉनसन को उत्तर प्रदेश के एक मरीज को 1 करोड़ 1 हजार 253 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, वहीं एक अन्य मरीज को 90 लाख 26 हजार 567 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इससे पहले महाराष्ट्र के एक मरीज को 74.5 लाख रुपये का मुआवजा देने को मंजूरी दी, वहीं दिल्ली के एक और शख्स को इस साल मार्च में 65 लाख रुपये मुआवजा घोषित किया गया।

एक और मरीज को 90 लाख से ज्यादा का मुआवजा

एक और मरीज को 90 लाख से ज्यादा का मुआवजा

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. एस ईश्वरा रेड्डी ने कहा, "दोषपूर्ण हिम इंप्लांट मामले में अब तक चार पीड़ितों को मुआवजा दिया गया है, वहीं करीब 200 एप्लिकेशन अभी भी विचाराधीन हैं।" इस मामले में मुआवजे की राशि का भुगतान आदेश जारी होने की तारीख के 30 दिनों के भीतर होना चाहिए। हालांकि जॉनसन एंड जॉनसन प्रा. लिमिटेड ने अभी तक पीड़ित मरीजों में से किसी को भी भुगतान नहीं किया है। कंपनी ने इस मामले में कोर्ट में अपील की है।

मार्च से अब तक चार मरीजों को मुआवजा देने के निर्देश

मार्च से अब तक चार मरीजों को मुआवजा देने के निर्देश

29 नवंबर, 2018 को, एक केंद्रीय विशेषज्ञ समिति ने प्रभावित मरीजों के लिए मुआवजे की राशि निर्धारित करने के लिए एक खास फॉर्मूला तय किया, इसके मुताबिक, 30 लाख रुपये से लेकर 1.23 करोड़ रुपये के बीच मुआवजा राशि देने को मंजूरी दी गई। हालांकि मुआवजा राशि का फैसला केस-टू-केस के आधार पर किया जाता है, जिसमें उम्र और व्यक्ति की डिसएबिलिटी के स्तर को आधार मानकर तय होता है। इसमें युवा वर्ग के मरीजों को अधिकतम मुआवजा मिलता है। सभी राज्यों को एक राज्य स्तरीय पैनल बनाने, पीड़ित मरीजों का पता लगाने और उनका वेरिफिकेशन करने और केंद्रीय समिति के फार्मूले के आधार पर मुआवजा राशि देने के लिए कहा गया है।

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