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'बिना मर्जी के महिला को छूना हमेशा यौन शोषण नहीं' - Delhi HC

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    नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने अनचाहे स्पर्श को लेकर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है हर अनचाहा स्पर्श यौन शोषण नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि कोई भी अनचाहा शारीरिक संपर्क तब तक यौन उत्पीड़न नहीं हो सकता जब तक कि वह यौन दृष्टि से न किया गया हो।

    'All unwelcome physical contact not sexual harassment' - Delhi High Court

    दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस विभु बख्रू ने कहा कि अगर अचानक कोई किसी से अनचाहे शारीरिक संपर्क में आता है तो वो यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी मंशा के बिना अगर कोई किसी दूसरे लिंग के व्यक्ति को अनचाहे तौर पर स्पर्श करता है तो वो यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता।

    दरअसल सीआरआरआई ने एक महिला साइंटिस्ट ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। अपनी अपनी याचिका में उन्होंने अपने सीनियर को यौन शोषण के मामले में क्लीनचिट दिए जाने का विरोध किया था। महिला ने साल 2005 में अपने सीनियर पर आरोप लगाया था कि उनके सीनियर ने अचानक उसके हाथ से सैंपल छीनकर उसे धक्का दिया था। इसी को लेकर उन्होंने विरोध किया था कि किसी भी तरह का अनचाहा स्पर्श यौन शोषण के दायरे में आना चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इसे यौन शोषण नहीं बल्कि आपसी झगड़ा बताया। जिसके बाद सीनियर साइंटिस्ट ने माफी भी मांगी थी।

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    English summary
    The Delhi High Court has commented on the unwanted touch. The court has said that not every spam touch can be sexual abuse. The court said that no untoward physical contact can result in sexual harassment unless it is sexually exploited.

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