यूजीसी ने कहा- संस्थान की पुष्टि के बिना जारी की जा रही फैलोशिप, अक्टूबर तक की राशि खातों में भेजी गई
यूजीसी ने कहा-
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से शनिवार को कहा गया है कि पहले रिसर्च स्कॉलरों को फेलोशिप त्रैमासिक आधार पर दी जाती थी, लेकिन रिसर्च सकॉलरों की वित्तीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, मासिक भुगतान की प्रणाली शुरू की गई थी। अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर मोड के माध्यम से पैसा जारी किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी के सचिव रजनीश जैन की ओर से जानकारी दी गई है कि अप्रैल 2020 के बाद से संस्थानों की ओर से पुष्टि पर जोर दिए बिना भुगतान किया जा रहा है। उन सभी को पेमेंट जारी की गई है, जिनकी मासिक पुष्टि जनवरी, फरवरी और मार्च या लॉकडाउन से पहले पोर्टल पर प्राप्त हुई।
इससे पहले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कोविड-19 महामारी के चलते विश्वविद्यालयों के लंबे समय से बंद रहने के मद्देनजर एमफिल और पीएचडी के छात्रों को शोध पत्र जमा करने के लिए और छह महीने का समय बढ़ाने का फैसला किया है।छात्रों को 31 दिसंबर तक की समय सीमा दी गई थी। अब इसे बढ़ा कर 30 जून कर दिया गया है। बता दें कि यूजीसी ने कोविड-19 महामारी एवं इसके चलते लागू किए गए लॉकडाउन के मद्देनजर विश्वविद्यालयों के लिए 29 अप्रैल को परीक्षा एवं अकादमिक कैलेंडर जारी किए थे। अपना शोधपत्र जमा करने वाले एमफिल और पीएचडी के छात्रों के लिए छह महीने की समय सीमा बढ़ाई गई थी।












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