अर्धसैनिक बलों में ‘अग्निवीरों’ को ही प्राथमिकता देगी सरकार, अमित शाह ने बताया- कितनी भर्तियां होंगी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने देश में 'अग्निपथ याेजना' के तहत नौकरियों की घोषणा की है। 'अग्निपथ याेजना' में सेना, नौसेना और वायु सेना में सैनिकों की 4 साल के लिए भर्ती होगी। इसमें साढ़े 17 और 21 वर्ष के आयु के युवाओं को भर्ती किया जाएगा और इन नवनियुक्त जवानों को 'अग्निवीर' कहा जाएगा। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, सरकार असम राइफल्स जैसे अर्धसैनिक बलों में 'अग्निवीर' को ही प्राथमिकता देगी।

सरकार ने इस साल 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती करने का लक्ष्य रखा है। इसे सुरक्षा पर कैबिनेट समिति ने मंजूरी दे दी है। वहीं, अभी शाह ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि, 'अग्निपथ' नामक एक नई अल्पकालिक भर्ती नीति के तहत रक्षा सेवाओं में भर्ती हुए सैनिकों को योजना के तहत चार साल पूरे करने के बाद अर्धसैनिक और असम राइफल्स में नौकरियों के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। नई भर्ती योजना भारतीय युवाओं को चार साल की अवधि के लिए सशस्त्र बलों के नियमित कैडर में सेवा करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि, इस साल, सशस्त्र बल साढ़े 17 और 21 वर्ष के आयु वर्ग में 46,000 अग्निवीरों की भर्ती करेंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कार्यालय की ओर से ट्वीट किया गया, "अग्निपथ योजना देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पीएम मोदी जी का दूरदर्शी और स्वागत योग्य निर्णय है।" इस संदर्भ में, आज गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ और असम राइफल्स की भर्ती में इस योजना के तहत 4 साल पूरे करने वाले अग्निवीरों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
'अग्निवीर' में नया या अलग क्या?
इसके लिए भर्ती की उम्र सीमा 17.5 से 21 साल रहेगी। यह सेवा अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों के लिए हाेगी। 4 साल की अवधि में 6 माह प्रशिक्षण शामिल है। इनकी अलग रैंक होगी, वर्दी-प्रतीक चिह्न भी अलग होंगे। खास बात यह है कि, इनके लिए जवानों की भर्ती प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा।

शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय के फैसले से 'अग्निपथ' के तहत प्रशिक्षित युवाओं को 'देश की सेवा और सुरक्षा में और भी योगदान करने में मदद मिलेगी,' उन्होंने कहा कि इस निर्णय पर विस्तृत योजना और काम शुरू हो गया है। सैन्य विशेषज्ञों की ओर से इस योजना को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है क्योंकि कुछ ने आगाह किया है कि यह सशस्त्र बलों के मनोबल और क्षमताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
सैन्य मामलों के विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया (सेवानिवृत्त) ने कहा कि, इसकी प्रभावशीलता का आंकलन करने के लिए योजना के कार्यान्वयन से पहले एक पायलट परियोजना शुरू की जानी चाहिए थी। वहीं, रिटायर्ड मेजर जनरल बीएस धनोआ ने कहा कि, ''यह 21वीं सदी की सेना में आवश्यक बड़े सुधारों के लिए उत्प्रेरक साबित हो सकता है।'












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