Budget 2025: कहां, कैसे मिलेगी केंद्रीय बजट की पूरी जानकारी? कौन से दस्तावेज अहम, जानिए सबकुछ
Union Budget 2025: केंद्र सरकार की योजनाओं पर खर्च, नए प्रस्तावित विकास कार्यक्रमों, लॉन्च किए जाने वाली स्कीम, करों में बदलावों समेत देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए केंद्रीय बजट एक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करने वाला होता है। आम तौर पर बजट के लिए सदन में बजट पेश होने के बाद वित्त मंत्री के भाषण को बजट की जानकारी का बड़ा स्रोत माना जाता है। हालांकि इसके अलावा बजट के बारीकी से अध्ययन के लिए उन अहम दस्तावेजों के बारे में जानना जरूरी है, जिसके जरिए बजट को बेहत ढंग से समझा जा सकता है।
बजट सत्र के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण के तुरंत बाद सदन के पटल पर केंद्रीय बजट से जुड़े कई दस्तावेज रखे जाते हैं। जिसमें केंद्र सरकार अपने दृष्टिकोण, नए कार्यक्रम शुरू करने की योजना, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन का आवंटन, विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन, आर्थिक विस्तार और रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था की राजकोषीय स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी अपडेट करती है।

बजट के 2 हिस्से
बजट मूल रूप से दो भागों में होता है। जिसमें पहले भाग में राजस्व प्राप्तियां और पूंजीगत प्राप्तियां शामिल होती हैं। जबकि दूसरे भाग में राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय शामिल होते हैं। वहीं बजट को अनुमान के आधार पर बजट को तीन भागों में बांटा गया है, जिसमें संतुलित बजट, अधिशेष या सरप्लस बजट, घाटे का बजट या डेफिसिट बजट होता है।
यहां मिलेगी बजट की पूरी जानकारी
सदन के पटल वित्त मंत्री के भाषण के तुरंत बाद रखने वाले जाने वाले केंद्रीय बजट के दस्तावेज में केंद्रीय बजट को लेकर दस्तावेज के पहले भाग में केंद्र सरकार विजन, नई योजनाएं, विकास कार्यों के क्रियान्वयन ने क धन आवंटन, आर्थिक विकास दर में वृद्धि, रोजगार के अवसर बढ़ाने समेत कई अहम पहलुओं को शामिल किया जाता है। जबकि दूसरे भाग में कराधान का जिक्र होता है।
दूसरे भाग में व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट मुनाफे पर कर में बदलाव, सीमा शुल्क में बदलाव और कर कानूनों के अनुपालन में अनुपालन बोझ को कम करने जैसे प्रावधान शामिल होते हैं।
बता दें कि वित्त मंत्री बजट में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में किसी भी बदलाव की घोषणा नहीं कर सकते क्योंकि ये निर्णय जीएसटी परिषद द्वारा किए जाते हैं जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री और सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं।












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