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RSS से जुड़े संगठनों ने बजट से पहले रखी अपनी मांगें, नौकरी, किसान अहम

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    नई दिल्ली। केंद्र सरकार अपना चौथा आम बजट पेश करने की तैयारी में है, इस बजट से देशभर के हर वर्ग को कई अपेक्षाएं हैं, जिनपर खरा उतरना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। एक तरफ जहां विपक्षी दल और तमा वर्ग अपनी-अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी संगठन भी तमाम मांगों को इस बजट में पूरा करने की मांग कर रहे हैं। इन संगठनों में स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ भी शामिल हैं, जिन्होंने वित्त मंत्रालय को बाकायदा एक पत्र लिखकर अपनी मांगों को बजट में शामिल किए जाने की अपील की है, इसमे मुख्य रूप से बेरोजगारी से निपटने व किसानों की समस्या को खत्म करने के लिए जरूरी प्रावधान बजट में किए जाने की मांग की गई है।

    कई मांग को आगे रखा गया

    कई मांग को आगे रखा गया

    अगले हफ्ते पेश होने वाले बजट से पहले इन संगठनों ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि इस बजट में ऐसे प्रावधान किए जाएं जिससे कि अधिक से अधिक संख्या में लोगों को रोजगार मुहैया कराए जाए। भारतीय किसान संघ ने किसानों की न्यूनतम मूल्य को बढ़ाने, जीएसटी मे किसानों को छूट सहित छोटे उद्योग को मजबूत करके लोगों को रोजगार के साधन मुहैया कराने की मांग की है। इन सगंठनों ने सरकार को सुझाव दिया है कि जीएसटी से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े असर को कम करने के प्रयास किए जाएं।

    जीडीपी की बजाए रोजगार पर ध्यान दें

    जीडीपी की बजाए रोजगार पर ध्यान दें

    स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन का कहना है कि बेरोजगारी बड़ी समस्या है और इससे निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है, हालांकि मौजूदा सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं लेकिन अभी और कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लोगों को कर में छूट, सब्सिडी में बढ़ोत्तरी सहित कई अहम कदम उठाए है जिसकी वजह से छोटे व्यापारियों को मदद मिली है। लेकिन हम अब जीडीपी को बढ़ाने वाले फॉर्मूले से आगे बढ़ते हुए रोजगार को बढ़ाने की ओर ध्यान देना होगा, साथ ही युवाओं के कौशल को बढ़ाने पर भी खास ध्यान देना होगा।

    ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान दें

    ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान दें

    जागरण मंचा का मानना है कि जीएसटी को लागू करने और इसके असर को बेहतर करने के लिए सरकार को थोड़ा नरम रुख अख्तियार करना चाहिए, साथ ही ऐसे तरीके ढूंढ़ने चाहिए ताकि को निवेश करने के संसाधन मिले, खासकर कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व रोजगार को बढ़ाने की ओर ध्यान देना चाहिए। आपको बता दें कि जागरण मंच काफी प्रभावशाली संस्था है, जिसके दबाव के चलते सरकार को जीएम फसलों, एचपीवी वैक्सीन के फैसलों में बदलाव करना पड़ा था। मंच का कहना है कि रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार को उद्योग को बेहतर करने की जरूरत है।

    आयुर्वेद व योग अहमजागरण मंच ने योग और आयुर्वेद के क्षेत्र को रोजगार देने के लिए काफी अहम माना है, उसका कहना है कि सरकार का इस ओर ध्यान जाना चाहिए और लोगों को अधिक फंड मुहैया कराना चाहिए, क्योंकि ये लोग एक साथ दो उद्देश्यों की पूर्ती कर सकते हैं, पहला यह कि इससे रोजगार सृजन होगा तो दूसरी ओर लोगों को सस्ता इलाज हासिल करने में भी सुविधा होगी।

    आयुर्वेद व योग अहमजागरण मंच ने योग और आयुर्वेद के क्षेत्र को रोजगार देने के लिए काफी अहम माना है, उसका कहना है कि सरकार का इस ओर ध्यान जाना चाहिए और लोगों को अधिक फंड मुहैया कराना चाहिए, क्योंकि ये लोग एक साथ दो उद्देश्यों की पूर्ती कर सकते हैं, पहला यह कि इससे रोजगार सृजन होगा तो दूसरी ओर लोगों को सस्ता इलाज हासिल करने में भी सुविधा होगी।

    जागरण मंच ने योग और आयुर्वेद के क्षेत्र को रोजगार देने के लिए काफी अहम माना है, उसका कहना है कि सरकार का इस ओर ध्यान जाना चाहिए और लोगों को अधिक फंड मुहैया कराना चाहिए, क्योंकि ये लोग एक साथ दो उद्देश्यों की पूर्ती कर सकते हैं, पहला यह कि इससे रोजगार सृजन होगा तो दूसरी ओर लोगों को सस्ता इलाज हासिल करने में भी सुविधा होगी।

    न्यूनतम कीमत को बढ़ाया जाए

    न्यूनतम कीमत को बढ़ाया जाए

    वहीं किसानों के लिए भारतीय किसान संघ चाहता है कि किसानों को उनकी फसल की न्यूनतम कीमत अधिक मिलनी चाहिेए और इस बात को सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनकी फसलों को हर संभव खरीदा जाना अनिवार्य किया जाए। साथ ही सिंचाई और कृषि क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना चाहिए, प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र के लिए 80 करोड़ रुपए के बजट का आवंटन किया है जोकि पर्याप्त नहीं है।

    राज्य-केंद्र के बीच बदले अनुपात

    राज्य-केंद्र के बीच बदले अनुपात

    इसके अलावा भारतीय किसान संघ ने यह भी मांग की है कि सरकार इस तरह का प्रावधान करे और छोटे किसानों को बजट मुहैया कराए ताकि वह अपनी फसलों को घर में ही स्टोर कर सकें और फसल की कीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी को कम कर सके। साथ ही संस्था चाहती है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक ऐसा फॉर्मूला बनना चाहिए जिससे कि मौजूदा निवेश 60:40 के औसत से बदलकर 80:20, 90:10 हो क्योंकि राज्य सरकारें इन योजनाओं में अधिक निवेश करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा देशी गायों की नस्ल को बेहतर करने के लिए बजट आवंटित किए जाने की भी मांग की गई है।

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    English summary
    Union budges 2018 RSS bodies want government to focus on job, msp and boost in small industries. These organization have written to the government.

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