MP News: UCC पर समिति ने सौंपी अंतिम रिपोर्ट, मध्यप्रदेश में कानून लागू करने की प्रक्रिया तेज, जनजातियों को बाहर रखने की सिफारिश

मध्य प्रदेश की एक उच्च-स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। दस्तावेज में सिफारिशें, प्रस्तावित कानून और व्यापक जन परामर्श का विवरण है, जिसमें मानसून सत्र में संभावित कानून बनने से पहले आदिवासी समुदायों और लैंगिक समानता के लिए सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर समिति के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। रिपोर्ट अब विधि विभाग को भेज दी गई है, जिसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। संभावना है कि विधेयक को मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया जाए।

UCC MP: Committee Submits Final Report

रिपोर्ट सौंपने के दौरान समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया मौजूद रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, को भी अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री को सौंपी गई यूसीसी रिपोर्ट तीन अलग-अलग खंडों में तैयार की गई है।

पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं शामिल हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रचलित विभिन्न कानूनों एवं परंपराओं का अध्ययन कर विस्तृत सुझाव दिए गए हैं। यह खंड 10 अध्यायों में विभाजित है।

दूसरे खंड में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप शामिल किया गया है। समिति ने इसे मध्यप्रदेश में लागू वर्तमान कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं।

तीसरे खंड में व्यापक जन-परामर्श का विवरण दिया गया है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यमों से सुझाव प्राप्त किए। कुल 9.58 लाख से अधिक सुझावों का विश्लेषण रिपोर्ट में प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार आधार पर शामिल किया गया है।

अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखने की सिफारिश

समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है। समिति का मानना है कि उनकी पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को यथावत बनाए रखा जाना चाहिए।

विवाह, तलाक और उत्तराधिकार सहित कई विषयों पर अध्ययन

राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों सहित विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी थी। समिति ने मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रारूप तैयार किया है। रिपोर्ट तैयार करते समय लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, प्रचलित रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखने तथा संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

विधि विभाग करेगा आगे की प्रक्रिया

समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन को राज्य शासन के विधि विभाग को सौंप दिया गया है। विधेयक में आवश्यक संशोधन और वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद मानसून सत्र में विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने समिति की अध्यक्ष सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर का भी आभार व्यक्त किया, जो व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके।

मुख्यमंत्री बोले- कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता पर समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार को मिल चुकी है और अब कांग्रेस को भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूसीसी हो या भोजशाला का विषय, कांग्रेस हर मुद्दे को केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सकारात्मक पहलू यह है कि सभी धर्मों के नागरिकों ने यूसीसी पर अपने विचार खुलकर रखे हैं, लेकिन कांग्रेस अब तक इस विषय पर अपना स्पष्ट पक्ष सामने नहीं रख सकी है।

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