UNESCO से विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाला भारत का पहला शहर बना अहमदाबाद ,जानें इतिहास
UNESCO से विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाला अहमदाबाद बना भारत का पहला शहर
अहमदाबाद। गुजरात के शहर अहमदाबाद के लिए खुशखबरी है। इस शहर को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO या यूनेस्को) ने इसे भारत पले वैश्विक धरोहर वाले शहर की मान्यता दी है।
यह फैसला यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी के 41वें सत्र में लिया गया।

रुचिरा कंबोज ने दी जानकारी
यूनेस्को में भारत की राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि रुचिका कंबोज ने यह जानकारी अपने ट्विटर हैंडल से साझा करते हुए लिखा कि यह घोषणा करते हुए मैं बहुत खुसश हूं कि यूनेस्को की ओर से अहमदाबाद को भारत का पहला विश्व धरोहर वाला शहर घोषित किया गया है।

इन देशों ने किया समर्थन
अहमदाबाद को विश्व धरोहर वाला शहर घोषित किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसे खुद के लिए गर्व का पल बताया है। अहमदाबाद को यह दर्जा देने के लिए तुर्की, लेबनान, ट्यूनीशिया, पुर्तगाल, पेरू, कजाकिस्तान, वियतनाम, फिनलैंड, अज़रबैजान, जामैका, क्रोएशिया, ज़िम्बाब्वे, तंजानिया, दक्षिण कोरिया, अंगोलम और क्यूबा सरीखे देशों ने समर्थन दिया।

ये उपलब्धियां बनीं आधार
इन मुल्कों ने अहमदाबाद को नक्काशीदार लकड़ी की हवेली की वास्तुकला के साथ कई वर्षों से जैन, हिंदू और इस्लामिक समुदायों के एक धर्मनिरपेक्ष सह-अस्तित्व वाला शहर मानते हुए सर्वसम्मित से समर्थन दिया। समर्थक देशों ने यह भी माना की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में भी इस शहर की भूमिका अनमोल थी।

ये है इतिहास
बता दें कि अहमदाबाद शहर का नाम सुल्तान अहमद शाह के नाम पर रखा गया है। यहां पर्यटन के लिए लिहाज से काँकरिया झील, हठीसिंह जैन मंदिर, जामा मस्जिद, रानी सिपरी मस्जिद, साबरमती आश्रम, केलिको संग्रहालय मुख्य रूप से प्रचलित है।

विजय रूपाणी ने कहा
इस मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि यह बहुत ही खुशी का मौका है। ट्वीटर पर रूपाणी ने लिखा है कि 'यह जानकर रोमांचित हूं कि अहमदाबाद को विश्व धरोहर के रूप में यूनेस्को से मान्यता दी गई है।' (तस्वीर में UNESCO की बैठक का एक दृश्य)












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