उच्च अनौपचारिक श्रम वाले इन 7 राज्यों में तेजी से बढ़ी है बेरोजगारी दर, जानिए कौन है ये राज्य ?
नई दिल्ली। तमिलनाडु, झारखंड, बिहार, कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश उन सात प्रदेशों में शामिल हैं, जहां अनौपचारिक कार्यबल सर्वाधिक काम करते हैं और अगर अप्रैल माह के आंकड़ों पर गौर करें तो पूरे देश की बेरोजगारी वृद्धि की तुलना में इन सातों राज्यों की बेरोजगारी की दर में पर्याप्त वृद्धि दर्ज हुई है।

उपरोक्त सातों राज्यों में बेरोगारी दर में पर्याप्त वृद्धि के लिए पिछले दो महीने से घोषित कोरोनोवायरस प्रेरित राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को जिम्मेदार माना जा सकता है, जिसके चलते दो महीनों में राज्यों में बेरोजगारी दर में 43.5 फीसदी की बढ़ गई है। इन सातों राज्यों में सबसे अधिक बेरोजगारी दर में वृद्धि तमिलनाडु (43.5 फीसदी) में हुई है।

तमिलनाडु के बाद झारखंड और बिहार के जुड़वां राज्यों में 30 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई। कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र में बेरोजगारी दर में 15 से 26 फीसदी के दायरे में वृद्धि सीमित थी, जबकि आंध्र प्रदेश में यह 5.7 फीसदी से 20.5 फीसदी तक उछल गई।

गौरतलब है पहली बार CMIE की मासिक बेरोजगारी दर अप्रैल 2020 में दोहरे अंकों में 23.5 फीसदी पर पहुंच गई है, क्योंकि कोरोनोवायरस प्रकोप प्रेरित लॉकडाउन के बाद लेबर मार्केट की कंडीशन खराब हो गई। पिछले महीने में नौकरी गंवाने वालों का दर 8.7 फीसदी बढ़कर 15 फीसदी पहुंच गया है।

उपरोक्त सात राज्यों में राष्ट्रीय औसत की तुलना में अनौपचारिक कार्यबल भारी संख्या में हैं। उनमें से कुछ के पास कामगार कर्मचारियों का उच्च हिस्सा है, जबकि अधिकांश आकस्मिक श्रम या नियमित वेतन या वेतनभोगी कर्मचारी हैं, जो बिना लिखित नौकरी अनुबंध, बगैर सामाजिक सुरक्षा लाभ और पेड लीव के पात्र भी नहीं हैं।

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार भारत के लगभग 25 फीसदी कार्यबल कैजुअल लेवर हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार और कर्नाटक जैसे राज्यों में 26 फीसदी से अधिक कार्यबल कैजुअल मजदूर के रूप में कार्यरत हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और झारखंड जैसे राज्यों में 40 फीसदी से अधिक नियमित वेतन या वेतनभोगी कर्मचारियों का एक वैध नौकरी अनुबंध है, जो कि भारत के 38 फीसदी के औसत की तुलना में अधिक है।

उल्लेखनीय है कोरोनोवायरस महामारी के प्रकोप के मामले को तेजी देखते हुए गत 18 मई को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन अपने चौथे चरण में प्रवेश कर लिया है, जिसमें उद्योग धंधों के ऑपरेशन की छूट गई है, लेकिन गत 25 मार्च से 3 मई के बीच पहले दो चरण सबसे मजदूरों के लिहाज से काफी कठोर थे, जिसने आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचाया, जिसका सर्वाधिक नुकसान अनौचारिक कार्यबल को हुआ।
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