COP14: बंजर जमीनों को हरा-भरा करने के लिये लिये गये ये संकल्प
नई दिल्ली। दुनिया भर में भूमि की बंजर अवस्था और तेजी से हो रहे मरुस्थलीकरण को रोकने के लिये और उसकी वजह से जलवायु परिवर्तन पर हो रहे प्रभाव पर संयुक्त राष्ट्र की इकाई यूनाइटेड नेशन्स कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेसर्टिफिकेशन (यूएनसीसी) द्वारा आयोजित सम्मेलन कॉप14 में दुनिया भर के 170 देशों ने इस दिशा में अहम फैसले लिये। इन फैसलों को एक संकल्प पत्र का रूप दिया गया, जिसका नाम "न्यू डेल्ही डिक्लेयरेशन" दिया गया।

कॉप14 के अध्यक्ष एवं देश के वन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इस संकल्प पत्र को कॉप14 के समापन समारोह में जारी किया। इस मौके पर प्रस्तुत हैं इस संकल्प पत्र के मुख्य अंश:
- दुनिया भर में उन परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जायेगा, जो भूमि के मरुस्थलीकरण को रोकने में कारगर होंगी। ऐसी परियोजनाओं में जन भागीदारी भी सुनिश्चित की जायेगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक हो सकें।
- जिन क्षेत्रों में सूखा अधिक पड़ता है, उन क्षेत्रों में पालट प्रोजेक्ट की तर्ज पर परियोजनाओं को चलाया जायेगा। चाहे वो ग्रामीण इलाकें हों या शहरी।
- मरुस्थलीकरण के प्रभावों के आर्थिक प्रभावों को कम करने की दिशा में प्रयास किये जायेंगे।
- दूर-दराज़ के इलाकों में खाली पड़ीं जमीनों में भारी संख्या में पेड़ लगाये जायेंगे, ताकि वो एक जंगल का रूप ले सकें। और इस प्रकार के पेड़ लगाये जायेंगे, जिनसे आस-पास के इलाकों में रहने वालों को आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकें।
- स्थानीय इकाईयों एवं राज्य सरकारों को इन परियोजनाओं में शामिल किया जायेगा, ताकि वे बेतरतीब शहरीकरण को नियंत्रित कर सकें। शहरीकरण की नीतियों में बदलाव की जरूरत पड़े तो वो भी किये जायेंगे, ताकि भूमि का सही प्रयोग पर्यावरण को होने वाले फायदों को देखते हुए किया जा सके।
- भारत में शुरु की गईं परियोजनाएं जैसे- हर खेत को पानी, मोर क्रॉप पर ड्रॉप, नेशनल एफॉरेस्टेशन प्रोग्राम, रार्ष्टीय कृषि विकास योजना, स्वॉइल हेल्थ स्कीम जैसी स्कीमों को दुनिया के अन्य देश भी अपनायेंगे।
- इनके अलावा इनमें कई ऐसे सुझाव दिये गये, जिन्हें सभी देशों की सरकारें नियम बना कर मरुस्थली को रोकने केा प्रयास करेंगे। साथ ही जनभागीदारी सुनिश्चित करेंगे।












Click it and Unblock the Notifications