एक टीचर को लेकर विवाद में घिरा Unacademy, जानिये स्टार्टअप के अंदर की कहानी...
Unacademy controversy: इन दिनों अपने एक अध्यापक की बर्खास्तगी करने को लेकर एजुकेशन प्लेटफॉर्म अनअकेडमी जबरदस्त सुर्खियों में बना हुआ है। छात्रों से पढ़े-लिखे उम्मीदवारों को वोट देने की अपील करने वाले शिक्षक करण सांगवान को बर्खास्त कर दिया गया है। हर तरफ इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है। ऐसे में चलिये बात करते हैं अनअकेडमी के बारे में...
अनअकेडमी पर उठे सवाल
अपने शिक्षक की बर्खास्तगी के बाद जब चारों ओर से अनअकेडमी से सवाल उठने लगे तो अपने एक बयान में एजुटेकशन प्लेटफॉर्म ने कहा कि क्लास व्यक्तिगत विचार साझा करने की जगह नहीं है। अनअकेडमी... वो प्लेटफॉर्म जो साल 2022 में बड़े स्तर पर कर्मियों की बर्खास्तगी को लेकर चर्चा में आया था। आज एक शिक्षक को फायर करने के बाद उन तमाम शिक्षकों की लोगों को याद आ गई, जिन्हें 2022 में कंपनी से निकाला गया था।

2022 में हुई बड़ी छटनी
बात है 7 नवंबर 2022 की, जब अनअकेडमी ने कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया। कंपनी के को फाउंडर और सीईओ गौरव मुंजाल ने कर्मियों को बताया कि कंपनी कर्मियों की संख्या में 10 फीसदी की कटौती करने जा रही है। उस साल की शुरुआत से अनअकेडमी अभी तक 800 से भी ज्यादा कर्मचारियों को हटा चुका है। तब कंपनी के 10 फीसदी वाले बयान के मुताबिक 350 कर्मियों की छंटनी होनी थी। लेकिन ये आंकड़ा बीते एक से डेढ़ साल के बीच बढ़ा ही है।
कैसे और कब शुरू हुआ अनअकेडमी?
ये तो रही छंटनी की बात, चलिये अब समझते हैं कि अनअकेडमी की शुरुआत कब और कैसे हुई थी। बताते चलें कि साल 2015 में मुंजाल ने रोमन सैनी और हेमेश सिंह के साथ मिलकर इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इससे पहले मुंजाल अकेले ही एक यूट्यूब चैनल के तौर पर इसका संचालन कर रहे थे। 2015 में शुरू करते वक्त इसे मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज के एंट्रेंस टेस्ट्स के लिए विद्यार्थियों की मदद करने के उद्देश्य से ही बनाया गया था।
वरदान बनकर आया 'कोरोना'
लेकिन बहुत जल्द स्टूडेंट्स के बीच ये प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो गया। विद्यार्थियों को इससे काफी मदद मिली। इस बीच कोरोना महामारी इसके लिए एक वरदान बनकर उभरी। कोरोना के वक्त स्मार्टफोन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल होने के चलते स्टूडेंट्स अनअकेडमी की मदद से ही पढ़ने लगे। साल 2021 FY की बात की जाए, तो कंपनी का रेवेन्यू करीब 400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनी ने अपने ब्रांड को और मजबूत बनाने और प्रसिद्ध करने के लिए इसमें अच्छा खासा निवेश भी किया।
ऑनलाइन ग्रोथ पर किया फोकस
आज अनअकैडमी के पूरे देशभर में 10 ऑफलाइन सेंटर्स हैं। कंपनी ने ऑनलाइन ग्रोथ पर भी काफी फोकस किया। एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि ऑफलाइन ग्रोथ ऑनलाइन ग्रोथ के मुकाबले काफी स्लो रह सकती है।
क्या है करण सांगवान का मामला?
दरअसल, करण सांगवान नाम के टीचर ने ऑनलाइन क्लास के दौरान छात्रों को सलाह दी कि उन्हें एक ऐसे उम्मीदवार को वोट करना चाहिए जो पढ़ा लिखा हो। ताकि जीवन में ये सब दोबारा ना झेलना पड़े। सांगवान ने आगे कहा कि सिर्फ ऐसे इंसान को न चुनें, जिन्हें नाम बदलना आता हो, नाम चेंज करना आता हो। देखते ही देखते ये वीडियो X (ट्विटर) पर तेजी से वायरल होने लगा।
यहां देखें करण सांगवान का वीडियो...












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