Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

UGC New Rule लाने वाले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान किस जाति से हैं? क्या करते हैं बेटे-बेटी? कहां हुई पढ़ाई

Dharmendra Pradhan Caste Son Daughter: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता से जुड़े नए यूजीसी नियमों पर अंतरिम रोक लगाई है और अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय है। तब तक 2012 वाला पुराना नियम लागू रहेगा।

इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान चर्चा के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया पर सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर धर्मेंद्र प्रधान खुद किस सामाजिक वर्ग (जाति) से आते हैं और उनके बच्चे क्या करते हैं। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशती यह रिपोर्ट पूरी तस्वीर सामने रखती है।

Dharmendra Pradhan Caste Son Daughte

धर्मेंद्र प्रधान किस जाति से हैं? (Dharmendra Pradhan Caste)

सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा पूछा जा रहा सवाल यही है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान खुद किस जाति से आते हैं। इसका जवाब खुद धर्मेंद्र प्रधान संसद में दे चुके हैं। वह कुर्मी जाति से ताल्लुक रखते हैं और अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर यह बात स्वीकार की है।

धर्मेंद्र प्रधान का परिवार (Dharmendra Pradhan Family Background)

धर्मेंद्र प्रधान की शादी मृदुला प्रधान से हुई है। उनका परिवार नई दिल्ली में रहता है। उनके दो बच्चे हैं, बेटी निमिषा प्रधान और बेटा निशांत प्रधान। यूजीसी विवाद के बाद इनके बारे में भी खूब सवाल पूछे जा रहे हैं।

Dharmendra Pradhan Caste Son Daughte

धर्मेंद्र प्रधान के बेटे निशांत प्रधान कौन हैं? (Who Is Nishant Pradhan)

निशांत प्रधान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बेटे हैं। उनके नाम का जिक्र धर्मेंद्र प्रधान के चुनावी हलफनामों में भी मिलता है, जहां संपत्तियों के ब्योरे में उनका नाम दर्ज है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निशांत प्रधान ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की है।

हालांकि, सार्वजनिक डोमेन में उनकी शिक्षा या पेशे को लेकर विस्तृत और आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। न तो किसी सरकारी वेबसाइट पर और न ही किसी सार्वजनिक प्रोफेशनल प्रोफाइल में उनके करियर को लेकर स्पष्ट विवरण मिलता है।

निमिषा प्रधान की प्रोफाइल (who is Nimisha Pradhan)

धर्मेंद्र प्रधान की बेटी का नाम निमिषा प्रधान है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान वह नीति आयोग में डेवलपमेंट स्टडीज डिपार्टमेंट में रिसर्च इंटर्न भी रह चुकी हैं।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक निमिषा एक प्रशिक्षित क्लासिकल डांसर भी हैं। कोविड महामारी के दौरान 2020 में धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर बताया था कि उनकी पत्नी मृदुला और बेटी निमिषा ने घर पर मास्क बनाकर जरूरतमंदों तक पहुंचाए थे। इससे साफ है कि निमिषा शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं।

Dharmendra Pradhan Caste Son Daughte

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही ट्रोलिंग? (Social Media Reactions)

यूजीसी नियमों को लेकर सोशल मीडिया पर धर्मेंद्र प्रधान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स उनकी बेटी की पढ़ाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो कुछ सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं समर्थकों का कहना है कि नए नियमों का मकसद भेदभाव खत्म करना है, न कि किसी वर्ग को निशाना बनाना।

UGC नियमों पर धर्मेंद्र प्रधान का पक्ष (What Dharmendra Pradhan Said)

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भेदभाव रोकने के नाम पर कानून का दुरुपयोग न हो, यह केंद्र, राज्य सरकारों और यूजीसी सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने साफ किया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और हर कदम संविधान के दायरे में उठाया जाएगा।

हालांकि, इस मुद्दे पर बीजेपी को अंदरूनी विरोध का भी सामना करना पड़ा। रायबरेली में बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने नए यूजीसी नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर समाज को जातियों में बांटने का आरोप लगाया।

UGC New Rule पर क्यों मचा बवाल? (Why UGC New Rule Is Controversial)

यूजीसी ने 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम 2026 जारी किया। इसका मकसद उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, विकलांगता और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। नए नियमों के तहत हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक इक्विटी सेल बनाना अनिवार्य किया गया है, जो भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी।

विवाद की जड़ यह है कि नए नियमों में एससी और एसटी के साथ ओबीसी को भी जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी से जुड़े कई छात्र और संगठन इसे अपने खिलाफ बता रहे हैं। उनका कहना है कि इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, जिससे जांच निष्पक्ष नहीं रह पाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की रोक से किसे राहत? (Supreme Court Stay Explained)

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के इन नए नियमों पर रोक लगाते हुए कहा है कि फिलहाल 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। कोर्ट इस मामले की विस्तृत सुनवाई 19 मार्च 2026 को करेगा। इसी दिन रोहित वेमुला की मां की ओर से दाखिल उस याचिका पर भी सुनवाई होगी, जिसमें कहा गया है कि 2012 के नियम कभी प्रभावी तरीके से लागू ही नहीं हुए।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक से नए नियमों के विरोध में खड़े तबके को राहत मिली है, लेकिन बहस थमी नहीं है। 19 मार्च 2026 को होने वाली सुनवाई तय करेगी कि यूजीसी के नए नियमों का भविष्य क्या होगा। तब तक धर्मेंद्र प्रधान और उनका मंत्रालय लगातार सवालों के घेरे में बने रहेंगे। स्पष्ट है कि यह मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि शिक्षा, समानता और सामाजिक संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

(नोट: धर्मेंद्र प्रधान के बच्चों के बारे में दी गई जानकारी रिपोर्ट के आधार पर लिखी गई है)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+