U-WIN जीत लेगा हर मां का दिल, बच्चों के टीके का रखेगा हिसाब, CoWIN की तरह काम करेगा
कोविन ने भारत को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में दुनिया भर में सम्मान दिलाया है। उसी की तर्ज पर यू-विन भी बनाया गया है, जो बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण का सारा रिकॉर्ड रखेगा।

बच्चों का टीकाकरण एक ऐसी आवश्यक आवश्यकता है कि उसे नजरअंदाज करने का सोचा भी नहीं जा सकता। लेकिन, फिर भी लापरवाही की वजह से टीकाकरण होता भी है, लेकिन कई बार वह सही समय पर होना रह जाता है। यह हमारे समाज की बहुत बड़ी समस्या रही है। टीकाकरण वाला पेपर तो है, लेकिन रखा कहां है वह याद नहीं रहता। इसी चक्कर में देर हो जाती है। लेकिन, अब सरकार जिस यू-विन प्लेटफॉर्म से टीकाकरण अभियान को जोड़ रही है, उससे यह चिंता हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

बच्चों के टीकों का हिसाब रखेगा यू-विन
बच्चों के एक भी टीका का समय न बीत जाए, इसके लिए सबसे ज्यादा माताएं ही चिंतित रहती हैं। टीके वाला जो चार्ट मिलता है, वह इधर-उधर रख दिया, इसके चक्कर में टीके का सही समय निकल जाना आम भारतीय घरों की समस्या है। लेकिन, टेक्नोलॉजी ने बड़ा समाधान दिया है। जिस तरह से कोविन ने कोरोना वैक्सिनेशन के दौरान हमारी मदद की थी, उसी तरह से यू-विन हमारे बच्चों और गर्भवती माताओं के टीके की खुराक का पूरा हिसाब रखेगा।

शिशुओं और गर्भवती माताओं को ट्रैक करना आसान- यूनिसेफ
यूनिसेफ इंडिया के हेल्थ ऑफिसर डॉक्टर मंगेश गधारी ने भी न्यूज18 को बताया है कि मोदी सरकार का यू-विन अगले वैक्सिनेशन डोज को ट्रैक करने के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। क्योंकि, हर साल 2.6 करोड़ नवजात शिशुओं और 2.9 करोड़ गर्भवती माताओं को इस मकसद से ट्रैक करना आसान नहीं है।

कोविन की तरह ही काम करेगा यू-विन
दरअसल, कोरोना वैक्सिनेशन के दौरान भारत सरकार के कोविन प्लेटफॉर्म ने कामयाबी का झंडा गाड़ा है। उसी से प्रभावित होकर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने यू-विन को लॉन्च किया है। इसमें भारत के यूनिवर्सल वैक्सिनेशन प्रोग्राम का पूरा डेटा डिजिटाइज किया जाना है। देश में कुछ महीने पहले इसका पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च हुआ था और रजिस्टर से सॉफ्टवेयर में डेटा एंट्री का काम शुरू हो चुका है।

टीकाकरण के कई समस्याओं का समाधान है यू-विन
डॉक्टर गधारी के मुताबिक, 'दशकों से स्वास्थ्य अधिकारियों और टीकाकरण कार्यों से जुड़े लोगों के लिए बच्चों के नियमित टीकाकरण की अगली खुराक को ट्रैक करना बड़ी चुनौती रही है। टीकाकरण के दौरान देखभाल करने वालों द्वारा मैटरनल चाइल्ड प्रोटेक्शन (एमसीपी) कार्ड साथ में लेकर नहीं आने से भी दिक्कत होती है।' यू-विन प्लेटफॉर्म इन सारी समस्याओं का समाधान है।
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स्लॉट बुक करने से लेकर रिमाइंडर तक की सुविधा
उन्होंने बताया कि कोविन की तरह यू-विन के जरिए न सिर्फ स्लॉट बुक किया जा सकता है, बल्कि यह तय तारीख से पहले रिमाइंडर भी भेजता है और रिकॉर्ड भी मेंटेंन रखता है। कोविन की तरह इससे सर्टिफिकेट भी मिल सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरी प्रक्रिया बहुत आसान है, जिसे ट्रैक करना भी बहुत सुगम है।

सरकार और लोग दोनों को ही मिलेगी ट्रैक करने की सुविधा
यू-विन की वजह से टीकाकरण अभियान की कई समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। यूनिसेफ के अधिकारी के मुताबिक, 'गर्भवती महिला और बच्चों के लिए यू-विन आने से वैक्सीन की रसीद और ABHA ID आईडी (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट )से जुड़ा इम्यूनाइजेशन कार्ड जेनरेट होगा और सभी राज्य और जिलों के साथ-साथ टीकाकरण में भागीदार (गर्भवती महिलाएं और बच्चे ) ट्रैकिंग के लिए उस कॉमन डेटाबेस को ऐक्सेस कर सकेंगे।'

'तीन लाख बच्चे जीरो डोज चिल्ड्रेन'
यूनिसेफ के अधिकारी का मानना है कि कोविड वैक्सिनेशन से इतनी सीख मिल चुकी है कि यू-विन में किसी तरह की परेशानी होने की संभावना नहीं है। 2014-15 में भारत में मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण अभियान शुरू होने के साथ ही छूटे हुए बच्चों (Missed children) का टीकाकरण कवरेज बढ़ाना बहुत बड़ा लक्ष्य रहा है। मिस्ड चिल्ड्रेन या जीरो डोज चिल्ड्रेन उन बच्चों को कहा जाता है, जिन्हें वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं पड़ी है। भारत में अनुमान के मुताबिक करीब तीन लाख बच्चे इसी श्रेणी में आते हैं।
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