JNU से मोदी सरकार के दो बड़े मंत्री भी कर चुके हैं पढ़ाई, जानिए इस विश्वविद्यालय से जुड़े 10 रोचक तथ्य
नई दिल्ली- जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी एक बार फिर से चर्चा में है। यहां के छात्र फिर से आंदोलन कर रहे हैं। फीस बढ़ाने के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। सरकार के मंत्रियों की ओर से छात्रों के प्रतिधिनियों से बात हो रही है। आंदोलनकारी छात्रों का ये भी आरोप है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उनकी अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले 2016 में भी देश जेएनयू कैंपस में एक बहुत बड़ा बवाल देख चुका है। ऐसी स्थिति में ऐसा लगता है कि सरकार में बैठे लोग जेएनयू के छात्रों की बातों को समझ ही नहीं पा रहे हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है। मोदी सरकार में ऐसे कई बड़े मंत्री हैं, जिन्होंने इसी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। ऐसे में आइए इस विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ बेहद ही रोचक और अनसुनी बातों को जानते हैं।

जेएनयू का विजन
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के ऐक्ट में इस बात का साफ जिक्र किया गया है कि 'यह विश्वविद्यालय उन सिद्धांतों को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा, जिसपर पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपने पूरे जीवन में काम किया, वो हैं- राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय, धर्मनिर्पेक्षता, जीवन का लोकतांत्रिक तरीका, अंतरराष्ट्रीय समझ और समाज की समस्याओं के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण। '

जेएनयू का मिशन
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के संस्थापकों ने इसकी स्थापना के जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं, उसमें भारत की समग्र संस्कृति को बढ़ावा देना शामिल है। इसके तहत यूनिवर्सिटी में आवश्यकतानुसार ऐसे विभागों और संस्थानों की स्थापना करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भारत की भाषाओं, कला और संस्कृति का विकास किया जा सके।

1,000 एकड़ से ज्यादा बड़ा कैंपस
जेएनयू कैंपस 1,000 एकड़ से भी ज्यादा इलाके में फैला हुआ है। यहां सभी स्कूलों और स्पेशल सेंटर्स के लिए अलग-अलग इमारतें हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की स्थापना 1969 में इंदिरा गांधी के शासन काल के दौरान संसद के एक कानून के जरिए की गई थी। इसे जेएनयू ऐक्ट 1966 के तहत स्थापित किया गया था, जो 1969 में अस्तित्व में आया।

जेएनयू की लाइब्रेरी
जेएनयू की सेंट्रल लाइब्रेरी की विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसका कार्पेट एरिया 1 लाख वर्ग फीट है। यह लाइब्रेरी एक नौ मंजिला इमारत में स्थित है। जेएनयू कैंपस में ही छात्रों के लिए होस्टल, फैकल्टी मेंबर्स और नॉनटीचिंग स्टाफ के लिए आवास भी मौजूद हैं। जेएनयू में पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र कैंपस में मौजूद होस्टल में ही रहते हैं। हाल ही में कैंपस में एक कन्वेंशन सेंटर भी बनाया गया है।

मोदी सरकार से जुड़े वो नाम जो जेएनयू में पढ़े
मौजूदा समय में मोदी सरकार से जुड़े कम से कम चार बड़े नाम हैं, जिन्होंने जेएनयू से पढ़ाई की है। इसमें मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर जैसे दिग्गज शामिल हैं। इसके अलावा नीति आयोग के सीईओ और 1980 बैच के आईएएस अमिताभ कांत भी जेएनयू के छात्र रहे हैं। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री रह चुकीं और बीजेपी की वरिष्ठ नेता मेनका गांधी ने भी यहां से पढ़ाई की है।

जेएनयू में पढ़ने वाले चर्चित नाम
मोदी सरकार के सियासी विरोधी और सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी भी जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के ही छात्र रहे हैं। उनसे पहले सीपीएम महासचिव रहे प्रकाश करात ने भी जेएनयू से ही पढ़ाई की है। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइजर रहे संजय बारू ने भी जेएनयू से ही पढ़ाई की है।

जेएनयू में पढ़ चुके अंतरराष्ट्रीय शख्सियत
हाल ही में अर्थशास्त्र के लिए नोबल पुरस्कार पाने वाले जाने-माने अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी भी जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के ही छात्र रहे हैं। वो भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर हैं।

जेएनयू में पढ़ने वाले दूसरे देशों के बड़े नाम
जेएनयू में पढ़ने वाले कुछ विदेशी छात्र अपने-अपने देशों के सर्वोच्च सियासी पदों पर भी पहुंचे हैं। इनमें पहला नाम लीबिया के पूर्व प्रधानमंत्री अली जिदान का है, जिन्होंने दिल्ली के जेएनयू में पढ़ाई की। उनके अलावा दूसरा नाम बाबूराम भट्टाराई का है, जो नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

जेएनयू का बजट
अगर जेएनयू के पिछले साल का बजट देखें तो यह करीब 200 करोड़ रुपये का था। लेकिन, यह विश्वविद्यालय कुछ और स्रोतों से भी फंड का जुगाड़ करता है। मसलन, 2013-14 में इसे यूजीसी से 243 करोड़ रुपये ग्रांट के तौर पर मिला। इसके अलावा इसकी आय के स्रोत में फीस, जमीन और इमारतों से होने वाली आमदनी भी शामिल है। यही नहीं इस फोर्ड फाउंडेशन, यूनेस्को, यूनीसेफ, सर रतन टाटा ट्रस्ट जैसे संस्थानों से भी फंड मिलते रहे हैं।

कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से समझौता
जेएनयू का कई देशों के करीब 150 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ करार है। इसके तहत ये विश्वविद्यालय आपस में फैकल्टी, स्टूडेंट्स, ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट और ज्वाइंट सेमीनार में एक-दूसरे का सहयोग करते हैं।












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