ऑपरेशन के बाद अलग की गईं दो जुड़ी हुई बच्चियां, लिवर और काफी कुछ था कॉमन

मुंबई। महाराष्ट्र के मुंबई में जुड़वा बच्चों को डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर सफलतापूर्वक एक दूसरे से अलग कर दिया। ये बच्चे एक दूसरे के शरीर से चिपके हुए पैदा हुए थे। हॉस्पिटल के काबिल डॉक्टरों ने इन दोनों को तकनीकी ऑपरेशन के जरिए अलग कर दोनों बच्चों को जीवनदान दिया। सफलतापूर्वक ऑपरेशन होने के बाद से बच्चों के माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। बुधवार को मुंबई के वाडिया हॉस्पिटल में यह जटिल और सफल ऑपरेशन किया गया। जुड़वा बच्चे में यकृत, आंत और मूत्राशय दोनों कॉमन होने की वजह से यह ऑपरेशन डॉक्टरों के लिए चैलेंज था। 20 डॉक्टरों की टीम ने करीब 12 घंटे के अथक प्रयास के जरिए यह सफल ऑपरेशन किया।

1 साल 3 माह बाद किया गया ऑपरेशन

1 साल 3 माह बाद किया गया ऑपरेशन

इन बच्चों की मां शीतल झाल्टे जब गर्भवती थी, तब 24 वें हफ्ते में डॉक्टरी जांच के दौरान यह पता चला था कि गर्भाशय में जुड़वा बच्चे हैं। ऑपरेशन से पहले ही माता पिता की काउंसलिंग डॉक्टरों द्वारा की गई थी। प्रसूति के बाद माता-पिता की सहमति के जरिए बच्चों का ऑपरेशन किया गया। वाडिया हॉस्पिटल में ही शीतल झाल्टे की डिलीवरी की गई थी, डिलीवरी के बाद ही दोनों बच्चों को ऑपरेशन के जरिए अलग-अलग करने का विचार किया गया।

वाडिया अस्पताल में लिया था जन्म, यहीं हुआ ऑपरेशन

वाडिया अस्पताल में लिया था जन्म, यहीं हुआ ऑपरेशन

यह ऑपरेशन डॉक्टरों के लिए इतना आसान नहीं था। डिलीवरी के बाद 19 सितंबर 2016 को शीतल ने लव और प्रिंस इन दोनों जुड़वा बच्चों को वाडिया हॉस्पिटल में ही जन्म दिया था। जन्म के बाद ऑपरेशन प्रक्रिया के लिए माता-पिता ने डॉक्टरों की बताई गई सलाह के अनुसार हमेशा बच्चों को हॉस्पिटल में जांच के लिए लेकर जाते थे। ऑपरेशन से पहले दोनों बच्चों के बहुत से मेडिकल टेस्ट किए गए, दोनों बच्चों का जन्म इसी हॉस्पिटल में होने की वजह से डॉक्टरों की टीम को ऑपरेशन का नियोजन करने में थोड़ी आसानी हुई।

दोनों एकदम सुरक्षित

दोनों एकदम सुरक्षित

दोनों बच्चों की तबीयत ठीक होने तक हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने इलाज को लेकर काफी उपाय योजना किए थे, जिसकी वजह से यह ऑपरेशन करने में भी डॉक्टरों को काफी आसानी हुई। दोनों बच्चों की तबीयत अब बिल्कुल ठीक है, जिसकी वजह से पूरा परिवार बहुत खुश हैं। इस ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में इन बच्चों को रखा गया, बच्चों की स्थिती भी स्थिर है।

काफी नाजुक रहे ऑपरेशन के क्षण

काफी नाजुक रहे ऑपरेशन के क्षण

एक साल तीन महीने की उम्र में बहुत ही नाजुक उम्र में यह ऑपरेशन किया गया, कुछ दिनों तक बच्चों पर विशेष ध्यान रखा जाएगा। उसके बाद बच्चों पर और भी ऑपरेशन किए जाएगें, जिसके जरिए बच्चे अपना जीवन अच्छे से जी सकें। दोनों बच्चों के शरीर के अंदर के अवयवों में त्वचा लगाने का काम काफी चैलेंजिंग था, पर डॉक्टरों के अथक प्रयास से यह ऑपरेशन सफल रहा। ऐसी जानकारी वाडिया हॉस्पिटल की सीईओ डॉ. मिनी बोधनवाला ने दी।

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