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मकर संक्रान्ति की ही तरह होता है 'टुसू पर्व', कुंवारी कन्याएं करती हैं पूजा

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Tusu Festival: कड़कड़ाती ठंड के बीच इस वक्त देश में त्योहारों का मौसम शुरु हो गया है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक लोग फसलों के कटने का जश्न मना रहे हैं। जहां आज पंजाब 'लोहड़ी' सेलिब्रेट कर रहा है, वहीं कल उत्तर भारत 'मकर संक्रान्ति' का त्योहार मनाएगा तो वहीं असम में 'बिहू' की तैयारी हो रही है, जबकि तमिलनाडु 'पोंगल' को सेलिब्रेट कर रहा है। लेकिन इन सबके बीच झारखंड में टुसू पर्व; मनाया जा रहा है। आम तौर पर लोगों को इस त्योहार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन आपको बता दें कि ये भी त्योहार फसलों से ही जुड़ा हुआ है। वैसे कुछ लोग बंगाल-ओडिशा में भी ये पर्व सेलिब्रेट करते हैं।

 टुसू की पूजा कुंवारी कन्याएं करती हैं

टुसू की पूजा कुंवारी कन्याएं करती हैं

दरअसल टुसू कुड़मी और आदिवासियों का प्रमुख त्योहार है। टुसू का मतलब होता है कुंवारी, इसलिए टुसू की पूजा कुंवारी कन्याएं करती हैं। यह पर्व एक महीने तक चलता है। कुंवारी कन्याएं अपने-अपने घरों में टुसू की स्थापना मिट्टी के बर्तन (सरवा) में दिनी के धान की यानी कि टुसूमणी की स्थापना करती हैं और हर दिन इसकी अलग-अलग फूलों के गुच्छों यानी कि टुसा फूलों से पूजा करती हैं और उत्सव मनाती हैं, नाचती गाती हैं, धान पर हर रोज 8 तरह के दानों से भोग लगाते हैं।

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 घरों को रंगोली और फूलों से सजाते हैं

घरों को रंगोली और फूलों से सजाते हैं

30 दिन पूरा होने पर सुबह नहा धोकर सूर्य की पूजा करते हैं और उसके बाद घर में उत्सव मनाते हैं। अपने घरों को रंगोली और फूलों से सजाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और पकवान बनाते हैं। फिर ढोल-नगाड़ों के साथ टुसूमणी को जलाशयों में इसकी विदाई की जाती है। कहीं-कही लोग शाम को मां लक्ष्मी और सरस्वती की भी पूजा करते हैं। यह कुड़मी और आदिवासियों के लिए यह नया वर्ष होता है।

कहानी

कहानी

ऐसा माना जाता है कि टुसू एक गरीब कुड़मी परिवार के घर में जन्मी एक सुंदर कन्या का नाम था। वो बहुत सुंदर-सुशील और सौम्य थी। उसके रूप-गुण के चर्चे चारों ओर होने लगे थे, एक दिन वहां के दुष्ट राजा की नजर उस पर पड़ी वो उसे पाने की कोशिश करने लगा और उसी दौरान राज्य में भयंकर अकाल पड़ा , जिसकी वजह से किसान लगान दे नहीं पा रहे थे। उस वक्त उस दुष्ट राजा ने लगान दो गुना कर दिया, जिस पर किसान और सैनिकों के बीच युद्ध छिड़ गया, जिसमें काफी संख्या में किसान मारे गये. इस बीच टुसू सैनिकों के पकड़ में आ गई लेकिन इससे पहले कि वो राजा के हाथ लगती उसने खुद को बचाने के लिए नदी में कूद गई, जिसके बाद से लोग टुसू को पूजने लग गए।

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English summary
Tusu Festival is a folk festival like Makar Sankranti, Read unknown facts
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