जानिए कौन थे वो लोग जो भीड़ जुटाने आये थे केजरीवाल के रोड शो में
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। आम आदमी पार्टी के चीफ अरविन्द केजरीवाल का रोड शो जब दिल्ली की सड़कों पर निकला तो टीवी चैनलों ने इसे शक्ति प्रदर्शन की संज्ञा दी। कईयों ने कहा कि इस भीड़ को देख भाजपाइयों के हाथ-पांव फूल गये, वहीं कुमार विश्वास ने इसे मानव समुद्र करार दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जुलूस में आये लोग कौन थे? क्या ये वाकई में दिल्ली के वोटर थे? रोड शो को देखकर भी कोई इस मुगालते में है कि दिल्ली की जनता ने उनके पिछले सारे गलतियों के लिए नकारने का मन बना लिया है तो उनकी आंखें खुल जानी चाहिए।

दिल्ली में डेरा
हालांकि यह सच है कि देश भर से आप कार्यकर्ता काफी समय पहले से दिल्ली में डेरा जमा चुके हैं। सड़क प्रदर्शन में उनकी भारी संख्या थी। वे दिल्ली के मतदाता नहीं हैं।
प्रभावी संदेश
वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार कहते हैं कि आखिर जनता के बीच यह संदेश तो गया ही है भीड़ इतनी हो गई कि वो समय पर नामांकन करने नहीं पहुंच सके। यह बहुत प्रभावी संदेश है। ज्यादा संभव है कि यह
सोची-समझी रणनीति
अरविन्द केजरीवाल और उनके रणनीतिकारों की सोची समझी रणनीति हो। वे इवेंट प्रबंधन, अभिनय और कैसे सुर्खियों में आया जाये इसके माहिर खिलाड़ी हैं। यही उनकी ताकत है और कमजोरी भी।
जानकार कहते हैं कि अगर मतदाता राजनीति को ठीक से समझें तो वे अरविन्द केजरीवाल को कभी स्वीकार न करें। पर मतदाता यह भी देखते हैं कि आखिर दूसरे कौन से दूध के धुले हैं। लोग कहते हैं कि अरविन्द लाख बुरा हो, झूठ बोलता हो, नाटक करता हो, बड़बोला हो, आरोपों से थूको और भागो का उनका स्वभाव हो, पर जितने दिन वे दिल्ली के मुख्यमंत्री थे पुलिस की हिम्मत नहीं थी कि घूस ले ले।
खैर,भाजपा को साफ पानी देने का जनता से वादा करना होगा। दूसरे, दिल्ली पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन है और घूसखोरी आम है। पुलिस के जिम्मे किसी गृह निर्माण में हस्तक्षेप का दायित्व नहीं है। पर यदि आप पुलिस को मोटी रकम नहीं देंगे तो आप एक दिवार तक नहीं खड़ी कर सकते। इसका असर मतदाताओं पर तो पड़ता ही है। नरेन्द्र मोदी जनता पर अपने प्रभाव और भाषण कला से इसकी काट कर सकते हैं। पर अब बागडोर किरण बेदी के हाथों है।












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