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ट्रिपल तलाक से बीजेपी ने यूपी की मुस्लिम महिलाओं का दिल जीता, क्या वोट भी ले पाएगी? ग्राउंड जीरो से चौंकाने वाली रिपोर्ट

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नई दिल्ली- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ट्रिपल तलाक (Triple talaq) का मुद्दा रूढ़ीवादी मुस्लिम समाज में लिंग भेद में उलझकर रह गया लगता है। ये वो इलाका है जहां मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक (Triple talaq) को महिलाओं पर सामाजिक अत्याचार के रूप में देखती हैं और इसे अपराध बनाने के लिए मोदी सरकार के प्रयासों की मुरीद भी हैं। इलाके की ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं ट्रिपल तलाक (Triple talaq) के मुद्दे पर पीएम मोदी के साथ डटकर खड़ी हैं और कहती हैं कि सरकार का फैसला मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उठाया गया कदम है। लेकिन, सवाल उठता है कि क्या उनकी ये राय वोट में तब्दील होगी?

मुस्लिम महिलाओं ने कहा क्या?

मुस्लिम महिलाओं ने कहा क्या?

तीन तलाक के मसले (Triple talaq) पर मुजफ्फरनगर की एक मुस्लिम गृहणी कैसर जहां में कापी उलझन में दिखीं। वह पंरपरागत बंदिशों से आजादी तो चाहती हैं, लेकिन फैसला लेने के वक्त पति के आगे सरेंडर हो जाती हैं। 6 साल के बच्चे की उस मां ने कहा, "ट्रिपल तलाक (Triple talaq) एक अत्याचार है, जिसे निश्चित ही अपराध घोषित किया जाना चाहिए। हमारे बारे में सोचने के लिए मैं बीजेपी को पसंद करती हूं।" लेकिन, इसके फौरन बाद उन्होंने तपाक से बोल दिया कि वो बीजेपी को वोट नहीं देंगी, क्योंकि उनके पति नहीं चाहते कि बीजेपी जीते। उन्होंने कहा, "मैं वहां वोट दूंगी जहां देने के लिए मेरे पति मुझसे कहेंगे। वे बीजेपी को नहीं चाहते, इसलिए मैं उसे वोट नहीं दूंगी।" पीटीआई ने जब कैसर से बात की तो वो एक दुकान के बाहर थीं। तभी उनके पति असलम वहां आ गए और अपनी बीवी को लेकर चले गए। इस दौरान असलम ने कहा- "हमारे धर्म में दखल मत दो। इसे राजनीति से दूर रखो।"

लगभग ऐसी ही हालत कैराना, मेरठ और बागपत में भी देखने को मिली, जहां पहले चरण में 11 अप्रैल को सहारानपुर, बिजनौर, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के साथ चुनाव होने हैं। कैराना में 35 साल की राबिया ने कहा- "ट्रिपल तलाक (Triple talaq) गलत चीज है, लेकिन हम बीजेपी के साथ नहीं हैं। मेरे पति कहते हैं कि हम उसे वोट देंगे, जिसे अखिलेश जी चुनाव में उतारेंगे।" मुजफ्फरनगर की फरजाना ट्रिपल तलाक पर अपना दर्द कुछ इस तरह बयां करती हैं- "मेरे पति ने मुझे तलाक देकर दूसरी महिला के साथ शादी कर ली। मेरे पास उनके फैसले को कबूल करने के अलावा कोई उपाय नहीं था। मैं अब अपने 4 साल के बेटे के साथ रहती हूं। तीन तलाक (Triple talaq)एक जघन्य प्रथा है। क्या हम मुस्लिम महिलाओं के पास अधिकार नहीं है?" पास के कैराना की सबा का भी कुछ ऐसा ही दर्द है, जो अब अपने मायके वालों के साथ रहती हैं। इस इलाके में कुल मिलाकर ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं ट्रिपल तलाक को अपराध घोषित करने के पक्ष में दिख रही हैं, अलबत्ता कुछ का मानना है कि 'अल्लाह' सबका हिसाब करेगा, लेकिन सरकार को इसमें नहीं पड़ना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

क्या है पूरा मामला?

ट्रिपल तलाक या तलाक-ए-बिद्दत (Triple talaq) ऐसी प्रथा है, जिसमें मुस्लिम पुरुष एक साथ तीन बार 'तलाक' बोलकर अपनी पत्नी को छोड़ सकता है। लेकिन, 2017 के अगस्त में अपने एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1,400 वर्ष पुरानी इस प्रथा को कई आधारों के साथ ही कुरान और शरियत के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध बताकरगैर-कानूनी ठहरा दिया था। इसके बाद सरकार ने मुस्लिम पुरुषों के लिए ट्रिपल तलाक को अपराध घोषित करने के लिए सितंबर 2018 में अध्यादेश लागू कर दिया। अधिकतर मुसलमान मानते हैं कि बीजेपी ऐसा करके न सिर्फ इस्लाम में दखल दे रही है, बल्कि इसके जरिए ध्रुवीकरण भी करना चाहती है।

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मुस्लिम पुरुषों ने क्या कहा?

मुस्लिम पुरुषों ने क्या कहा?

एक आंकड़े के मुताबिक यूपी में पहले दौर में जहां चुनाव हो रहे हैं, वहां कुल 1.5 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं में मुस्लिमों की संख्या लगभग 35% है। इस लिहाज से पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोट के मायने आसानी से समझे जा सकते हैं। लेकिन, फिलहाल ये वोटर बीजेपी को निराश ही करते नजर आ रहे हैं। मेरठ में सिगरेट की एक दुकान चलाने वाले फैसल खान कहते हैं, मोदी सरकार ने मुसलमानों का वोट पाने के लिए एक 'सोची-समझी सियासी फैसले' के तहत यह कदम उठाया था, लेकिन इससे उसे कोई फायदा नहीं मिलेगा। वे कहते हैं- "तीन तलाक (Triple talaq)हमारे इस्लाम में है। इसमें दखल देने वाले वे कौन होते हैं? हम अपनी महिलाओं का ख्याल रख सकते हैं और इसके लिए हमें सरकार की जरूरत नहीं है। हम बीजेपी को दोबारा नहीं जीतने देंगे।"

कैराना में 30 साल के ट्रक ड्राइवर मोहम्मद आमिर अरशद भी कुछ इसी तरह की बात कहते हैं। उनके मुताबिक- "इन वर्षों में बीजेपी ने हिंदू और मुसलमानों का ध्रुवीकरण किया। अब वे इस्लाम में पुरुषों और महिलाओं को बांटना चाहते हैं। वे सोचते हैं कि यह एक बहुत ही सकारात्मक कदम है, लेकिन सच्चाई ये है कि यह हमारे धर्म में दखल है।" उनके साथ मौजूद बाकी मुस्लिम पुरुष भी उनकी हां में हां मिलाते हैं। बागपत के एक डॉक्टर असद कहते हैं- "बहुत सारे बड़े मुद्दे हैं, उसपर ध्यान देना चाहिए। वे हमारे निजी मामलों में क्यों घुस रहे हैं। हमारी महिलाएं हमारी जिम्मेदारी हैं। हम देख लेंगे कि क्या करना है।"

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English summary
Triple talaq debate divides women and men in western UP
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