माया-ममता के बल पर लोकसभा से ट्राइ संशोधन बिल पास, अब राज्यसभा की चुनौती

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नई दिल्ली। कानून को ताक पर रखकर योग्यता को अहमयित देने वाला ट्राइ संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है। पूर्व टेलीकॉम रेगुलेटर नृपेंद्र मिश्र को पीएम का प्रिंसिपल सेक्रेटरी नियुक्त करने के मुद्दे पर सत्ताधारी बीजेपी ने जहां कांग्रेस की सहयोगी बसपा और एनसीपी को अपनी ओर कर लिया, वहीं कांग्रेस विरोधी तृणमूल ने भी इस मुद्दे पर सरकार का साथ दिया।

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बीजेपी द्वारा लोकसभा में पेश किए गए ट्राई संशोधन बिल पर कांग्रेस की सहयोगी मायावती और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही कह दिया था कि वे इस बिल का विरोध नहीं करेंगे। बसपा का लोकसभा में एक भी सांसद नहीं है, लेकिन उनके बयान से स्पष्ट है कि वह राज्यसभा में सरकार का साथ देने में गुरेज नहीं करेगी।

तृणमूल ने राज्यपाल के मुद्दे पर कांग्रेस के साथ मिलकर जबरदस्त विरोध जताया था, लेकिन सदन में वह पूरी तरह सरकार के साथ हो गई और अपने पुराने स्टैंड से पाला बदल लिया। तृणमूल कांग्रेस के नेता, संदीप बंदोपाध्याय ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस एक जिम्मेदार पार्टी है। प्रधानमंत्री को यह अधिकार है कि वे अपनी पसंद के किसी ऑफिसर को उक्त पद के लिए नियुक्त कर सकते हैं।"

राज्य सभा में इस बिल को पास कराने के लिए सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। हालांकि उसे माया से एक बार फिर बात करनी होगी जो राज्यसभा में अच्छी-खासी संख्या रखती हैं। बिल पास होने के बाद उस अध्यादेश का स्थान ले लेगा, जिसके तहत टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी एक्ट में संशोधन किया गया है।

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